जयपुर (मनीष गोधा)। Boycott Chinese Products: इस बार की दीपावली काफी अलग होगी। चीन के खिलाफ विरोध की लहर को देखते हुए बहुत संभावना है कि इस बार दीपावली पर स्वदेशी जगमगाहट दिखाई दे। इस स्वदेशी जगमगाहट की जमीनी तैयारी अभी से शुरू हो गई है। हर बार दीपावली के बाजारों में चीनी माल की भरमार रहती है, लेकिन इस बार इनकी जगह स्वदेशी सामान नजर आ सकता है। पटाखे, विद्युत सज्जा का सामान, सजावटी सामान, दीये, उपहार, खिलौने, गणेश-लक्ष्मी की मूर्तियां इत्यादि बहुत सा सामान चीन से आता है। लेकिन इस बार चीन की हरकत से लोग इतने ज्यादा नाराज हैं कि चीनी सामान का लगातार बहिष्कार कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी वोकल फॉर लोकल का स्पष्ट नारा देश को दे चुके हैं। तमाम परिस्थितियों के बीच त्योहारी सीजन के लिए तैयारी शुरू हो गई है और इस बार संभावना है कि बाजार स्वदेशी रंग में नजर आएंगे।

चीनी उत्पादों के बहिष्कार को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का प्रकल्प सेवा भारती भी सक्रिय भूमिका में है। जयपुर में सेवा भारती ने विद्युत सज्जा का सामान (एलईडी लड़ियां) बनाने का काम शुरू कराया है। इसके माध्यम से शहर की पिछड़ी बस्तियों के जरूरतमंद युवाओं को रोजगार भी मुहैया हो रहा है।

सेवा भारती के जयपुर प्रांत के सहमंत्री धर्मचंद जैन ने बताया कि जयपुर में सेवा भारती की ओर से कौशल विकास योजना चलाई जाती है। चीनी उत्पादों के बहिष्कार की देशव्यापी अपील को देखते हुए इस बार स्वदेशी लड़ियां तैयार कराने का काम हाथ में लिया गया है। दीपावली पर इन्हें सेवा भारती के कौशल विकास केंद्र के माध्यम से संघ के कार्यकर्ताओं के जरिए ही बेचा जाएगा।

उन्होंने कहा - हम आसपास की बस्तियों के बेरोजगार युवाओं को एलईडी बल्बों की रंग-बिरंगी लड़ियां बनाने का निशुल्क प्रशिक्षण दे रहे हैं, ताकि वे स्वरोजगार से जुड़ सकें। यह ऐसा काम है, जो आसानी से सीखा जा सकता है। इन लड़ियों की अच्छी खपत भी होती है, इसे देखते हुए इस बार लक्ष्य को बढ़ाया गया है। लड़ियां बनाने के लिए देश में ही निर्मित तार, कैप, एलईडी बल्ब इत्यादि सामान का उपयोग किया जाता है। प्रशिक्षण केंद्र पर प्रतिदिन 6 प्रशिक्षुओं द्वारा 40 फीट लंबी करीब 120 से अधिक लड़ियां बनाई जाती हैं। प्रत्येक लड़ी में 50 एलईडी बल्ब लगाए जाते हैं। इसकी लागत करीब 110 रुपए प्रति लड़ी है। युवाओं का एक बैच काम सीख लेता है तो दूसरे युवाओं को यह सिखाया जाता है। इस तरह यह क्रम अनवरत जारी है।

उन्होंने बताया कि इन बेरोजगार युवाओं को ये लड़ियां बनाने का प्रशिक्षण देने के साथ ही इन्हें प्रति लड़ी 20 रुपए के हिसाब से मेहनताने का भुगतान भी किया जाता है। यह काम सीखने के बाद वे अपने स्तर पर यह काम करते हैं। सेवा भारती के केंद्र के अलावा जयपुर में दो और स्थानों पर यहां से सीखे हुए कार्यकर्ता ही क्षेत्र के जरूरतमंद युवाओं को यह काम सिखा रहे हैं। इन्हें भी सामान सेवा भारती की ओर से ही उपलब्ध कराया जाता है।

जैन ने बताया कि जल्द ही जयपुर में तीन-चार अन्य स्थानों पर यह काम सिखाने की शुरुआत की जाएगी ताकि दीपावली से पहले अच्छी संख्या में ये लड़ियां तैयार हो सकें और आम लोग चीनी लड़ियों को छोड़कर इनका उपयोग कर पाएं। इन केंद्रों पर छोटे इलेक्ट्रिक उपकरणों का निर्माण और महिलाओं के लिए सिलाई प्रशिक्षण आदि भी दिया जाता है, लेकिन फिलहाल यह सब रुका हुआ है और सिर्फ लड़ियों के निर्माण का काम किया जा रहा है।

संपूर्ण राजस्थान में राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से चीनी उत्पादों के बहिष्कार का अभियान तेज गति से चलाया जा रहा है। इसके तहत व्यापारियों और आम लोगों से संपर्क किया जा रहा है।

Posted By: Rahul Vavikar

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