शशी कुमार यादव, जयपुर। राजस्थान में होने वाले विधानसभा चुनाव में प्रदेश के कई नौकरशाह भी टिकट की दावेदारी कर राजनीति में भाग्य आजमाने की कोशिश कर रहे हैं। प्रदेश के पुलिस व प्रशासनिक अधिकारियों से लेकर कर्मचारी नेताओं तक चुनाव में भाग्य आजमाने को लेकर काफी उत्सुकता दिखा रहे हैं। इनमें से कई तो बाकायदा स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर चुनावी दंगल में कूदने जा रहे हैं।

नौकरशाह आमजन से कुशल और संवेदनशील नेता के रूप में उनकी समस्याओं की पुरजोर पैरवी करने का वादा कर रहे हैं तो पार्टियों के समक्ष जिताऊ व टिकाऊ उम्मीदवार साबित होने का दावा भी कर रहे हैं। माना जा रहा है अगर इस वर्ग को पार्टियां टिकट देती हैं तो विधानसभा चुनाव में इस बार 10 से भी ज्यादा नौकरशाह भाग्य आजमा सकते हैं। सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी और राज्य के पूर्व मुख्य सचिव रहे एस. अहमद के भी चुनाव में दावेदारी की खबरें जारों पर हैं। वह भरतुपर के कामां से चुनावी समर में उतरने को लेकर रुचि दिखा रहे हैं। पुलिस अधिकारियों में राजेंद्रसिंह शेखावत का नाम सर्वाधिक चर्चा में है। इनका नाम दातांरामगढ़ व एक अन्य सीट पर बतौर भाजपा दावेदारों में चल रहा है।

सेवानिवृत्त आईएएस रामखिलाड़ी मीणा के करौली व सवाईमाधोपुर जिले में किसी एक जगह से चुनाव लड़ने की चर्चा है। वहीं पूर्व आईएएस जेपी चंदेलिया भी पिलानी से चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जा रहे हैं। इसी तरह दूदू विधानसभा सीट से सेवानिवृत्त अतिरिक्त परिवहन आयुक्त हरिनारायण बैरवा भाजपा की टिकट की आस में हैं। उधर, बीकानेर की एक सीट से सेवानिवृत्त प्रशासनिक अधिकारी ओपी हर्ष के चुनावी समर में उतरने और टिकट के लिए उनकी दावेदारी जताने की चर्चाएं जोरों पर हैं। कर्मचारी नेता महेश व्यास स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति लेकर बीकानेर पश्चिम सीट से भाजपा की टिकट मांग रहे हैं। बीकानेर पूर्व से कर्मचारी नेता शिवशंकर ओझा भाजपा से टिकट की उम्मीद लगाए हुए हैं। देवली-उनियारा सीट से कर्मचारी नेता डॉ. विक्रमसिंह गुर्जर कांग्रेस से और फुलेरा से शंकरसिंह मनोहर भाजपा से टिकट की आस में हैं। टोंक से भाजपा से अबूबकर नकवी चुनाव लड़ने के इच्छुक बताए जा रहे हैं। पूर्व आईएएस अधिकारी आरएस गठाला भी राजपा की ओर से चुनावी दंगल में कूदने की तैयारी कर रहे हैं।

कई बने हैं मंत्री-सांसद

कई पूर्व अधिकारी मंत्री और सांसद भी रह चुके हैं। केंद्रीय मंत्री नमोनारायण मीणा प्रदेश के सेवानिवृत्त एडीजी पद पर रह चुके हैं। बीकानेर सांसद अर्जुन मेघवाल प्रशासनिक अधिकारी रह चुके हैं। नागौर से चुनाव लड़ चुके मूलचंद आर्य भी प्रशासनिक अधिकारी रहे हैं। इसी तरह नागौर सांसद भंवर डांगावास उच्च पद पर सेवा दे चुके हैं। कर्नल सोनाराम, मानवेंद्रसिंह व जसवंत सिंह भी सेना में अधिकारी रह चुके हैं।

चुनाव मैदान में उतरने का कारण

नौकरशाहों और कर्मचारियों के चुनाव मैदान में उतरने का सबसे अहम कारण उनका जनता से जुड़ाव और शिक्षित होना है। यही वजह है कि प्रशासनिक, पुलिस व अन्य क्षेत्र से जुड़े नौकरशाह राजनीति में

भाग्य आजमाने में ज्यादा रुचि दिखाने लगे हैं। हालांकि अब तक के अनुभव के आधार पर अधिकांश नौकरशाह सफल राजनीतिक साबित नहीं होते, क्योंकि ये जनता में घुल-मिल पाने में दिक्कत महसूस करते हैं। फिर भी ये पूर्व नौकरशाह पूरी दमखम के साथ पार्टियों के टिकट के लिए ताल ठोंक रहे हैं।

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