जयपुर। परीक्षा का बोझ बहुत हद तक कम कर चुका केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) अब बच्चों के होमवर्क का बोझ भी कम करने की कवायद में जुटा है। इसके लिए एक परियोजना पर काम किया जा रहा है। स्कूलों को एक ऑनलाइन प्रश्नावली भेजी गई है।

यह प्रश्नावली 15 सितंबर तक भरी जानी है और इसके आधार पर सामने आए सुझावों के आधार पर सीबीएसई होमवर्क को लेकर नई गाइडलाइन तैयार कर सकता है। फिलहाल यह गाडइलाइन छठी से आठवीं तक के बच्चों के लिए तैयार की जाएगी।

माना जा रहा है कि होमवर्क का सबसे ज्यादा बोझ इन्हीं कक्षाओं में होता है। छोटी कक्षाओं में होमवर्क पहले ही कम किया जा चुका है और माध्यमिक स्तर की कक्षाओं में भी होमवर्क कम किया जा चुका है।

इंटरनेट का अधिक उपयोग

सीबीएसई की इस परियोजना में बच्चों को परंपरागत ढंग से होमवर्क देने के बजाए, इसमें इंटरनेट के इस्तेमाल को बढ़ाने, इसे ज्यादा रुचिकर बनाने और होमवर्क पर खर्च होने वाले समय को घटाने पर कवायद की जा रही है। प्रश्नावली में स्कूलों से पूछे गए प्रश्न ज्यादातर इसी से संबंधित है।

इसी तरह का एक सर्वे अभिभावकों के बीच किए जाने की संभावना भी है। सोसायटी फॉर अनएडेड प्राइवेट स्कूल्स के अध्यक्ष दामोदर गोयल कहते हैं सीबीएसई की यह कवायद तो अच्छी है, लेकिन इसे बहुत सावधानी से लागू करने की जरूरत है, क्योंकि होमवर्क के जरिए ही अभिभावक बच्चे की पढ़ाई का मूल्यांकन करते हैं और इसमें तकनीक के दुरुपयोग की संभावना भी रहेगी।

कुछ ऐसे हैं प्रश्न

  • बच्चों को होमवर्क देने का उद्देश्य क्या होता है।
  • क्या सब बच्चों को होमवर्क दिया जाना जरूरी है।
  • एक सप्ताह में हर विषय में अधिकतम कितना होमवर्क दिया जाना चाहिए।
  • क्या हर विषय में होमवर्क दिया जाना चाहिए।
  • क्या होमवर्क में इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है।
  • यदि इंटरनेट का इस्तेमाल किया जा सकता है तो यह किस रूप में हो सकता है।
  • होमवर्क टीचिंग में कैसे मददगार है।
  • होमवर्क की मार्किंग क्या बच्चों को बताई जानी चाहिए।

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