जोधपुर 14 जुलाई। देश में जल जीवन मिशन ने एक और मील का पत्थर पार कर लिया है। अब देश के 1 लाख से ज्यादा गांवों और 50,309 पंचायतों में प्रत्येक परिवार को स्वच्छ जल मिल रहा है, लेकिन जल संकट से सर्वाधिक जूझने वाले राजस्थान की स्थिति चिंतनीय ही बनी हुई है। राज्य के केवल 582 गांवों और 63 पंचायतों में 100 प्रतिशत नल कनेक्शन लग सके हैं। आठ जिले जैसलमेर, प्रतापगढ़, भरतपुर, बांसवाड़ा, धौलपुर, दौसा, बारां और बाड़मेर में तो 10 प्रतिशत के लक्ष्य को भी हासिल नहीं किया जा सका है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह जिले जोधपुर की तीन पंचायत खरबेरा पुरोहितन, सलावास और रायसर में ही सौ प्रतिशत घरों में नल कनेक्शन लग सके हैं। केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में राजस्थान के 101.32 लाख ग्रामीण घरों में से केवल 20,37,582 (20.11 प्रतिशत) में नल से जल की सुविधा उपलब्ध है।

इसी तरह जैसलमेर जिले के 1,04,124 ग्रामीण घरों में से सिर्फ 3862 के पास नल कनेक्शन हैं, यानी 96.29 प्रतिशत परिवार बिना पानी कनेक्शन के जीवन यापन कर रहे हैं। जल जीवन मिशन लागू होने के बाद से सिर्फ 1420 घरों में नए कनेक्शन दिए गए हैं। राज्य के 33 में से एक भी जिला ऐसा नहीं है, जहां की आधी ग्रामीण आबादी के घर में नल का कनेक्शन राज्य सरकार पहुंचा पाई हो। 15 अगस्त, 2019 को जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सभी ग्रामीण घरों में नल से शुद्ध जल पहुंचाने के लिए ‘जल जीवन मिशन’ की घोषणा की थी, तब राजस्थान में 11,74,131 (11.59 प्रतिशत) ग्रामीण घरों में नल से जल आता था। 23 महीनों में जहां देश भर में 4,48,78,920 (23.69 प्रतिशत) ग्रामीण घरों तक शुद्ध जल पहुंचा, वहीं राजस्थान में 8,63,451 (8.52 प्रतिशत) ग्रामीण घर ही ऐसे थे।

जानकारी अनुसार, 3.6 लाख करोड़ रुपए की इस योजना में आधी राशि केंद्र और आधी राज्य सरकार को वहन करनी है। संविधान में जल राज्य का विषय है ऐसे में योजना का कार्यान्वयन राज्यों को ही करना है। वर्ष 2021-22 के लिए राजस्थान को केंद्रीय अनुदान चार गुना बढ़ाकर 10,181 करोड़ रुपए आवंटित किया गया है। 2019-20 में राज्य को 1,301.71 करोड़ का केंद्रीय अनुदान जारी किया गया था, जबकि राज्य के पास उस समय 313.67 करोड़ रुपए का ओपनिंग बैलेंस मौजूद था। वर्ष के अंत में इसमें से भी 995.07 करोड़ रुपए खर्च नहीं हो पाए।वर्ष 2020-21 में राजस्थान को 2,522.03 करोड़ रुपए का केंद्रीय अनुदान आवंटित किया गया था, जिसमें से राजस्थान सरकार ने केवल 630.51 करोड़ रुपए ही लिए, यानी 1,891.52 करोड़ रुपए की अनुदान राशि ली ही नहीं। राज्य उपलब्ध केंद्रीय अनुदान की राशि में से 863.53 करोड़ रुपए भी खर्च नहीं कर पाया।केंद्रीय जलशक्ति मंत्रालय के अनुसार वर्तमान में जल जीवन मिशन के लिए राजस्थान सरकार के पास 22,494 करोड़ रुपए का विशाल कोष उपलब्ध है।

राजस्थान में जल जीवन मिशन को लागू करने की धीमी गति पर केंद्रीय मंत्री शेखावत ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को हाल में विस्तृत पत्र भेजा था, जिसमें उन्होंने आग्रह किया था कि राज्य में पेयजल आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए, प्लानिंग और कार्यान्वायन में तेजी लाई जाए, ताकि राज्य आवंटित राशि का पूरा उपयोग कर सके। शेखावत ने कहा था कि अगर राज्य सरकार ‘जल जीवन मिशन’ के अंतर्गत दिए जा रहे केंद्रीय अनुदान का पूरा उपयोग करे तो राज्यों के ग्रामीण इलाकों में भारी पूंजी निवेश हो सकेगा। गांवों में आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के ठोस अवसर उपलब्ध होंगे।

Posted By: Shailendra Kumar

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