जयपुर (ब्यूरो)। कांग्रेस अपने परंपरागत वोट बैंक अनुसूचित जाति को अपने साथ बनाए रखने के लिए विशेष रणनीति पर काम कर रही है। इसके तहत पहली बार राजस्थान में सात संभागों में अनुसूचित जाति के नेताओं को अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ के प्रभारी के रूप में लगाया गया है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी खुद इसकी मॉनिटरिंग कर रहे हैं और हर तीन माह में इन प्रभारियों की राहुल गांधी के साथ बैठक का शेड्यूल बनाया गया है।

एक भी एससी विधायक नहीं

राजस्थान में अनुसूचित जाति वर्ग को कांग्रेस का परंपरागत वोट बैंक माना जाता है, लेकिन इस बार के विधानसभा और लोकसभा चुनाव में इस वर्ग से पार्टी को खास समर्थन नहीं मिल पाया। पहली बार ऐसा हुआ कांग्रेस का अनुसूचित जाति का एक भी विधायक इस बार विधानसभा में नहीं पहुंच पाया। इस हालत को सुधारने के लिए अब कांग्रेस ने अपने अनुसूचित जाति प्रकोष्ठ को बहुत मजबूत करने की कवायद शुरू की है।इसके तहत सात वरिष्ठ नेताओं को प्रदेश के सातों संभागों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इनमें दो-तीन पूर्व मंत्री और विधायक भी शामिल हैं।

इन नेताओं से कहा गया है कि हर माह उनके संभाग के अनुसूचित जाति के नेताओं के साथ बैठक करें। अनुसूचित जाति के लोगों को जोड़ने के लिए कार्यक्रम किए जाएं और इसकी रिपोर्ट दिल्ली भेजें। हर तीन माह में राहुल गांधी खुद इनके साथ बैठक कर फीडबैक लेंगे। इन सातों प्रभारियों का चयन भी नेताओं की रायशुमारी के बाद ही किया गया है। इस संबंध में प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय में इन प्रभारियों की पहली बैठक बुलाई गई है।

Posted By:

fantasy cricket
fantasy cricket