जयपुर। राजस्थान झुंझुनूं जिले के खेतड़ी उपखण्ड के कोठी की ढाणी गांव में एक विधवा मां अपनी विवाहिता बेटी को दस साल से जंजीरों में बांध कर रखने के लिए मजबूर है। गुलाब नाम की इस विवाहिता को उसके सुसराल वालों ने छोड़ दिया है। परिजनो का कहना है कि इस खुला छोड़ दिया जाए तो यह भाग कर पहाड़ पर चढ़ जाती है और वापस नहीं आती, जिससे हमको मजबूर होकर पेड़ से बांधना पड़ रहा है।

गुलाब की 11 साल पहले की जिंदगी खुशी-खुशी से गुजर रही थी। शादी के एक साल बाद विवाहिता ने एक बच्ची को जन्म दिया। डिलीवरी के बाद ही विवाहिता में पागलपन के दौरे आने शुरू हो गए। ससुराल वालों ने पागल घोषित कर विवाहिता को पीहर कोठी की ढाणी में लाकर छोड़ दिया। आज यह बेटी भी मां के साथ ही यहां रहती हैं। शुरूआत में तो पीडि़ता की मां ने खेतड़ी, चिड़ावा और जिला मुख्यालय झुंझुनूं के अस्पतालों में इलाज के लिए दर-दर भटकती रही, लेकिन गरीबी की वजह से बड़े अस्पतालों में इलाज नहीं करवा पाई और दो साल भटकने के बाद आखिर गुलाब को जंजीरो में बांध दिया।

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पीड़ि‍ता को पेड़ से बांधने की खबर ग्राम पंचायत को काफी समय से मालूम है, लेकिन पंचायत की तरफ से भी कोई सहायता नहीं दी गई है। इसे सामाजिक सुरक्षा पेंशन भी नहीं मिल रही हैं। पंचायत ने अभी तक पीड़ि‍ता का नाम बीपीएल सूची में भी नहीं जोड़ा है। जबकि इसके लिए कोई कागज भी नहीं चाहिए।

घर का खर्चा बेवा मां शांती देवी को वृद्धावस्था पेंशन मिलने वाले सात सौ रुपयों से ही चल रहा है। पंचायत के ग्रामसेवक बलवंत कुमार व सरपंच दीपिका कंवर का कहना है कि इनके पास मेडिकल कागजात नहीं होने की वजह से समाजिक पेंशन नहीं दी जा रही है, लेकिन अब प्रयास किए जाएंगे।

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