मनीष गोधा, जयपुर। देश में चल रही आर्थिक मंदी और पहले से खस्ता माली हालत के चलते राजस्थान सरकार को अब सरकारी खर्च में कमी करनी पड रही है। सरकार के वित्त विभाग को मितव्ययता परिपत्र जारी करना पड़ा है और सभी नए खर्चों पर आगामी आदेश तक रोक लगा दी गई है। विभागों को सख्त हिदायत दी गई है कि जो बजट दिया गया है उसी मे काम चलाए। देश में आर्थिक मंदी का असर राजस्थान की अर्थव्यवस्था पर भी दिख रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष के पहले पांच माह के आंकड़ों की बात करें तो सरकार को TAX से होने वाली आय में पिछले वर्ष के मुकाबले काफी कमी है। पिछले वर्ष अगस्त तक सरकार को करोंं से 36 प्रतिशत तक आय हो चुकी थी जो इस वर्ष 31.86 प्रतिशत ही है, यानी करीब पांच प्रतिशत की कमी है।

सरकार की आय का मुख्य स्रोत जीएसटी से होने वाली आय है। इसमें पिछले वर्ष के मुकाबले 10 प्रतिशत की गिरावट है। पिछले वर्ष अगस्त तक जीएसटी से 42.51 प्रतिशत आय हो गई थी, जबकि इस बार जीएसटी से सिर्फ 32.44 प्रतिशत आय हुई है। इसके अलावा स्टाम्प और रजिस्ट्रेशन तथा बिक्री कर से होने वाली आय में भी कमी है। केन्द्रीय करों में से राज्य को मिलने वाला अंश भी करीब दो प्रतिशत कम मिला है।

गैर कर राजस्व में भी करीब चार प्रतिशत की कमी है। इस तरह सरकार की कुल प्राप्तियां जो पिछले वर्ष अगस्त तक 38.91 प्रतिशत से ज्यादा थी वे इस बार 32.56 प्रतिशत ही है। इस तरह विभिन्न स्रोतों से होने वाली प्राप्तियों में छह प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट है। वहीं खर्चों की बात की जाए तो अब तक 32 प्रतिशत खर्च हो चुका है जो पिछले वर्ष से लमभग बराबर है।

कुछ मदों में पिछले वर्ष के मुकाबले बहुत ज्यादा खर्च है जैसे सब्सिडी का खर्च जो पिछले वर्ष 16.69 प्रतिशत था, वह इस बार बढ कर 19.51 प्रतिशत हो गया है। वेतन और पेंशन का खर्च भी बढा है। सरकार को किसान कर्ज माफी और बेरोजगारी भत्ते जैसे चुनावी वादे पूरे करने के लिए भी काफी व्यवस्थाएं करनी पड़ी हैं। इन सब स्थितियों के कारण ही सरकार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नजर नहीं आ रही है।

खर्च कम करने के लिए सरकार ने अपने सभी विभागों को निर्देश दिए हैं कि एक जैसी प्रकृति की योजनाओं को चिन्हित कर उन्हें आपस में मर्ज करने के प्रस्ताव तैयार करे। इस पर सभी विभागों मे कवायद चल ही रही है कि इसी बीच वित्त विभाग ने अब मितव्यवता परिपत्र भी जारी कर दिया है।

अतिरिक्त मुख्य सचिव निरंजन आर्य की ओर से जारी इस परिपत्र में सरकारी विभागों को कहा गया है कि बजट प्रावधानों के अंदर रहते हुए ही काम करें और कोई नए खर्चे न करें। कोई काम बहुत ज्यादा जरूरी हो तो मुख्यमंत्री से अनुमति लेकर ही काम करें। सरकार का यह मितव्ययता परिपत्र राज्यपाल सचिवालय, उच्च न्यायालय, चुनाव विभाग और विधानसभा को छोड़कर पूरी सरकार मे लागू होगा।

ऐसे करनी होगी सरकारी खर्च में कमी

- विभागों से कहा गया है कि उन्हें दिए गए बजट के अनुसार ही खर्चा करें और एक साथ सारा पैसा खर्च न करें, बल्कि हर माह में समानुपातिक खर्च किया जाए।

- जो योजनाएं केन्द्र सरकार की सहायता से चल रही हैंं, उनमें केन्द्र के हिस्से की राशि आने के बाद ही राज्य के हिस्से की राशि खर्च की जाए

- बजट में की गई घोषणाओ के अलावा कोई नया पद सृजित नहीं किया जाए

- भर्तियां चरणबद्ध तरीके से हो ताकि कोई पद रिक्त न रहे।

- नए भवनों का निर्माण सरकार के नियमों के अनुसार और पूरी मितव्ययता के साथ किया जाए।

- बजट और पहले से घोषित खर्च के अलावा किसी तरह का नया खर्च नहीं किया जाए

Posted By: Navodit Saktawat