रंजन दवे, जोधपुर। भारतीय वायुसेना की ताकत रहे बाहादुर मिग- 27 लड़ाकू विमान सेना के बेड़े से शुक्रवार को रिटायर हो गया। कारगिल युद्ध के दौरान इसी विमान ने पाकिस्तान को नेस्तनाबूत कर दिया था। इस विमान को जब वायुसेना के जोधपुर स्थित एयरबेस से कैनन सलामी के साथ आखिरी विदाई दी गयी तो पानी की बौछारों के बीच से गुजरते मिग 27 ने वहां मौजूद कई लोगों की आखों को भी नम कर दिया। इस मौके पर वायुसेना के कई शीर्ष ऑफिसर मौजूद रहे।

करगिल वार में निभाई थी अहम भूमिका

वायु सेना के सभी प्रमुख ऑपरेशन्स में भाग लेने के साथ मिग-27 नें 1999 के करगिल युद्ध में भी एक अभूतपूर्व भूमिका निभाई थी। 1999 में जब पाकिस्तानी घुसपैठिये चोटियों पर घात लगाकर बैठे थे तो एकाएक उन पर आसमान से गोले बरसने शुरू हो गए। ये बमबारी इतनी सटीक थी कि दुश्मन को संभलने तक का मौका नहीं मिला। यह कमाल मिग 27 ने किया था।

इन खूबियों से थी पहचान

मिग 27 विमान 1700 किलोमीटर प्रति घंटे की उड़ान भरने में सक्षम था और एक साथ 4 हजार किलो तक हथियार ले जा सकता था। दुश्मन के ठिकानों को भेदने की अचूक क्षमता वाले इस विमान के पराक्रम की बदौलत ही इसे कारगिल युद्ध के बाद 'बहादुर' का नाम दिया गया था। मिग-27 ने 1999 में हुए करगिल युद्ध के दौरान अहम भूमिका निभाई थी। 2002 में मिग-27 लड़ाकू विमान के अपग्रेडेशन का काम शुरू हुआ जो साल 2009 में पूरा हुआ। इस दौरान इसमें अत्याधुनिक उपकरण लगाए गए थे। इंजन में तकनीकी खामी और इसके कलपुर्जे नहीं मिलने की वजह से इसे सेवामुक्त किया गया।

लगभग चार दशक का रहा साथ

1982 के दशक में इस विमान को रूस से खरीदा गया था। मिग 27 विमान चार दशक तक भारतीय वायुसेना के साथ जुड़ा रहा। शुक्रवार को आकाशगंगा की सूर्यकिरण, आकाशगंगा टीम और मिग 27 ने इस विदाई समारोह के दौरान परफॉर्म किया। अंत में फाइटर जेट के दस्तावेज हैंडओवर किया। कारगिल युद्ध के दौरान जिस विमानों ने सबसे पहले पाकिस्तानी घुसपैठियों के ठिकानों पर हमला बोला था उनमें से मिग-27 भी एक था।

Posted By: Neeraj Vyas