मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान में सरकारी भर्तियां अदालतों में न फंसे इसके लिए सरकार ने विभागों को कड़े निर्देश जारी किए हैंं और ताकीद किया है कि भर्ती निकालने से पहले हर तरह कमी दूर कर ली जाए। इस मामले में किसी तरह की लापरवाही पाई गई तो इसे सरकार के स्तर पर गंभीरता से लिया जाएगा।

राजस्थान में मौजूदा सरकार ने 75 हजार नौकरियां देने का वादा किया था। यह काम चल रहा है और विभिन्न विभागों द्वारा भर्तियां निकाली भी जा रही है। भर्ती परीक्षाओं का काम राजस्थान लोकसेवा आयेाग और राज्य अधीनस्थ कर्मचारी बोर्ड द्वारा किया जाता है, लेकिन राजस्थान में लगभग हर भर्ती किसी न किसी स्तर पर पर कानूनी चक्‍कर में फंसती हैंं और इसे लेकर कोर्ट केस दायर होते हैंं। राजस्‍थान बेरोजगार एकीकृत महासंघ के अध्यक्ष उपेन यादव बताते हैं कि इस समय की बात करें तो 38 हजार 600 से ज्यादा पदों की भर्तियों का मामला कोर्ट में अटका हुआ है। इनमें विदयालय सहायक के 33456 पदों का मामला 2015 से कोर्ट में है। यह मामला बोनस अंक दिए जाने की मांग को लेकर कोर्ट पहुंचा था।

इन पदों के इतने मामले अटके

इसी तरह कृषि पर्यवेक्षकों के 1832 पद, महिला सुपरवाइजर के 180 पद, महिला सुपरवाइजर आंगनवाड़ी के 309 पद और प्रयोगशला सहायक के 1200 पदों की भर्तियां भी कोर्ट केस के चलते अटकी हुई है। इन परीक्षाअेां में फर्जी ओएमआर शीट के मामले सामने आए थे। इसके अलावा राजस्थान प्रशासनिक सेवा मुख्य परीक्षा का मामला भी आरक्षण विवाद के कारण कोर्ट में है। इसके 1017 पदों की भर्ती अटकी हुई हैं।

सीएम ने दिए निर्देश

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने पिछले दिनों भर्तियों को लेकर मौजूदा स्थिति की समीक्षा की थी और इसकी नियमित माॅनिटरिंग करने के निर्देश भी दिए थे। इस बैठक में कोर्ट केसेज का मामला भी सामने आया था। इसे देखते हुए ही अब सरकार के कार्मिक विभाग ने सभी विभागों को परिपत्र भेज कर कहा है कि भर्तियां अनावश्यक अदालती पचड़े में न फंसे इसका सभी विभाग विशेष ध्यान रखें।

भर्तियों के कोर्ट में अटकने पर विभागों की ढिलाई पर कार्रवाई की जाएगी। परिपत्र में कहा गया है कि भर्तियों के लंबित मामलों में शीघ्र सकारात्मक निस्तारण की कार्रवाई करें। भर्ती की विज्ञप्ति जारी करने से पूर्व नियमों को अच्छी तरह से देख लें।

प्रावधान अनुसार आरक्षण का वर्गीकरण, योग्यता निर्धारण, पाठ्यक्रम और परीक्षा योजना संबंधित सभी बिंदुओं की पालना सही ढंग से की जाए ताकि भर्तियां अनावश्यक रूप से कानूनी पचड़े में ना फंसे। कार्मिक विभाग की प्रमुख सचिव रोली सिंह ने कहा कि विभागों की ओर से भर्तियों में न्यायिक विवादों के निस्तारण में शिथिलता को राज्य सरकार के स्तर पर गंभीरता से लिया जाएगा।

Posted By: Navodit Saktawat

fantasy cricket
fantasy cricket