जयपुर। राजस्थान सरकार 1971 से 1999 की अवधि में शहीद हुए राज्य के सैनिकों के आश्रितों को सरकारी नौकरी देने पर विचार कर रही है। इसके साथ ही शहीदों और सैनिकों के बारे में जानकारी स्कूल व काॅलेज पाठयक्रम में शामिल की जाएगी।

राजस्थान में सेना में जाने वालोंं की अच्छी खासी संख्या है। सरकार के इस रवैये से जरूर उन लोगों को राहत मिलेगी जिनके यहां कमाने वाला एक ही व्‍यक्ति रहा होगा और वह भी शहीद हो गया होगा। ऐसे में सरकार का यह कदम एक संबल बनकर सामने आ सकता है।

प्रदेश के सीकर, चूरू, झुुंझुनू, अलवर, भरतपुर, धौलपुर, सहित विभिन्न हिस्सों से बडी संख्या में जवान सेना में भर्ती होते हैंं। यही कारण है कि शहीदों की संख्या भी काफी है। राजस्थान सरकार में अब तक 1947 से 1970 तक के शहीदों के परिजनों को नौकरी दी गई है।

अब सरकार 1971 से 1999 तक के शहीदों के आश्रितों को भी नौकरी देने पर विचार कर रही है। सैनिक कल्याण मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने बताया कि इस बारे में पूर्व सैनिकों और शहीद परिवारों की तरफ से काफी मांग आ रही है, लेकिन इसमें कुछ समस्याएं है।

ऐसे ज्यादातर मामलों में आश्रितों की उम्र अधिक हो चुकी है। इसके अलावा कुछ अन्य व्यवहारिक समसयाएं भी है। इनका अध्ययन करने और इस बारे में एक निश्चित नीति बनाने के लिए अधिकारियों को कहा गया है। उन्होंने बताया कि सैनिकों और शहीदो से जुडी सामग्री को पाठयक्रम का हिस्सा भी बनाया जा रहा है।

इसके लिए एक समिति बनाई गई है। यह समिति पाठयक्रम में शामिल की जाने वाली सामग्री तैयार करेगी। इसके अलावा प्रदेश के सभी 24 सैनिककल्याण केन्द्रों पर सेना में भर्ती के लिए निशुल्क कोचिंग शुरू की जाएगी। ताकि सेना में भर्ती की इच्छा रखने वाले युवा अपने जिलों में ही इसकी तैयारी कर सकें। इसके साथ हर माह में एक बार में वे पूर्वसैनिकों, शहीदों के परिवारेां की समस्याएं भी सुनेंगे।

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