जयपुर। राजस्थान के गुर्जरों ने 50 फीसद की सीमा के भीतर ही आरक्षण देने की मांग उठाकर राजस्थान सरकार के लिए राजनीतिक और सामाजिक रू प से बड़ी मुश्किल खड़ी कर दी है।

गुर्जर चाहते हैं कि उन्हें मौजूदा ओबीसी में ही वर्गीकरण कर पांच फीसद आरक्षण का लाभ दिया जाए, ताकि कोर्ट का चक्कर ही खत्म हो जाए।

राजस्थान में ओबीसी में जाटों सहित अन्य जातियों का बड़ा वर्ग है और सरकार को गुर्जरों की मांग पूरी करने के लिए पहले इन्हें राजी करना पड़ेगा, जिसे बेहद मुश्किल काम माना जा रहा है।

राजस्थान में विशेष पिछड़ा वर्ग (एसबीसी) में आरक्षण मिलने से पहले गुर्जर ओबीसी में थे, लेकिन ओबीसी में जाटों सहित बड़ी संख्या में जातियां हैं, ऐसे में गुर्जरों को मौका नहीं मिल पा रहा था।

इसीलिए उन्होंने अलग आरक्षण की मांग उठाई थी। राजस्थान हाई कोर्ट द्वारा विशेष पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने का बिल रद्द करने के आदेश के बाद राजस्थान में इस समय गुर्जरों को कहीं भी आरक्षण प्राप्त नहीं है। वे सामान्य वर्ग में आ गए हैं।

सुप्रीम कोर्ट जाने में है खतरा

सरकार ने गुर्जरों को अलग से आरक्षण दिया तो यह 50 फीसद की सीमा पार कर गया और कोर्ट ने इस पर रोक लगा दी। अब सरकार इस मामले में हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर करने का विचार कर रही है, लेकिन 50 फीसद से अधिक का चक्कर होने के कारण गुर्जर अब सुप्रीम कोर्ट जाने में ज्यादा इच्छुक नहीं हैं।

गुर्जर नेताओं का कहना है कि सरकार सुप्रीम कोर्ट जाती है और वहां से भी राहत नहीं मिलती है तो हमेशा के लिए रास्ता बंद हो जाएगा, जैसा कई प्रदेशों में जाटों के आरक्षण के साथ हुआ। यही कारण है कि अब उनका जोर इस बात पर है कि सरकार 50 फीसद की सीमा के भीतर ही आरक्षण दे।

यह सुझाया रास्ता

गुर्जर नेता हिम्मत सिंह गुर्जर का कहना है कि हमने सरकार से कहा है कि हमें 50 फीसद की सीमा के भीतर ही आरक्षण देने के लिए ओबीसी में वर्गीकरण कर दिया जाए और हमें अलग से पांच फीसद आरक्षण दे दिया जाए।

यह सुझाव शुक्रवार को हुई वार्ता में रखा गया है। हिम्मत सिंह ने बताया कि सरकार ओबीसी में शामिल जातियों के सामाजिक नेताओं से बात करे तो इसका रास्ता निकल सकता है, अन्यथा यह मामला यूं ही फंसा रहेगा।

सरकार फंसी है मुश्किल में

इस मामले को लेकर सरकार में भी अभी दुविधा की स्थिति बनी हुई है। आधिकारिक रू प से अभी भी यही कहा जा रहा है कि गुर्जरों को आरक्षण का लाभ हर हालत में दिया जाएगा।

मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने खुद गुर्जरों के प्रतिनिधिमंडल को यह भरोसा दिलाया है, लेकिन इसके उपायों को लेकर सरकार के बीच अभी मंथन का दौर ही चल रहा है।

हालंकि ओबीसी में वर्गीकरण की मांग पूरा करना सरकार के लिए राजनीतिक और जातिगत रू प से बहुत मुश्किल है, क्योंकि जाट राजस्थान की 200 में से लगभग 50 सीटों को सीधे तौर पर प्रभावित करते हैं और बहुत बड़ा समुदाय है।

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