राजस्‍थान में एक बार फिर से गुर्जर आंदोलन शुरू हो सकता है। इसे लेकर समाज के लोग तैयारी कर रहे हैं। यदि इस बार यह आंदोलन होता है तो इसका मुद्दा गुर्जर सहित 5 जातियों को लेकर रहेगा। समाज के लोगों ने इसे देखते हुए आगामी 17 अक्‍टूबर को महापंचायत भी बुलाई है। इसके बाद ही आंदोलन की रूपरेखा पर बात बन सकती है। गुर्जर सहित पांच जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग में दिए गए पांच फीसद आरक्षण को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल करने और राज्य सरकार की नौकरियों में आरक्षण का लाभ देने की मांग को लेकर आंदोलन की तैयारी की जा रही है। इसी कड़ी में गुर्जर नेताओं ने करौली से दिल्ली तक कूच की घोषणा की है। कूच की तारीख तय करने को लेकर 17 अक्टूबर को मलारना डूंगर में गुर्जर समाज की महापंचायत बुलाई गई है। गुर्जर आरक्षण संघर्ष समिति के संयोजक कर्नल किरोड़ी सिह बैंसला ने राज्य सरकार पर समाज के साथ हुए समझौते की पालना नहीं करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा है कि सरकार सब जानती है कि हम क्या चाहते हैं, ऐसे में हम सरकार के साथ वार्ता नहीं करेंगे। डेढ़ साल से मुख्य सचिव और सरकार के बीच उच्च स्तर पर वार्ता ही हो रही है। प्रक्रियाधीन भर्तियों में गुर्जरों सहित विशेष पिछड़ा वर्ग में शामिल पांच जातियों को आरक्षण का पूर्णरूप से लाभ नहीं मिल रहा है। हाल ही में राज्य सरकार ने खेल मंत्री अशोक चांदना को गुर्जर नेताओं से वार्ता करने के लिए अधिकृत किया है। अशोक चांदना ने कहा था कि यदि आवश्यकता हुई तो वह खुद जाकर गुर्जर नेताओं से वार्ता करेंगे।

इन पांच जातियों का है मामला

राज्य सरकार ने गुर्जर, रैबारी, रायका, गाड़िया लुहार और बंजारा जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग में पांच फीसद आरक्षण का एलान किया था। करीब डेढ़ साल पहले सत्ता में आई अशोक गहलोत सरकार ने विधानसभा में एक संकल्प पारित करा कर केंद्र सरकार को भेजा, जिसमें कहा गया कि विशेष पिछड़ा वर्ग में शामिल की गई उक्त जातियों का मामला संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल किया जाए।

Posted By: Navodit Saktawat

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Makar Sankranti
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