जयपुर। जेल के कैदियों का शादियों में वैसे तो कोई काम नहीं होता, लेकिन जोधपुर जेल के कैदी न सिर्फ शादियों में जाते हैं, बल्कि बैंड बजा कर खुशी भी बढ़ाते हैं। ईमानदारी इतनी कि काम पूरा होने के बाद ये कैदी वापस जेल लौट आते हैं। इन पर नजर रखने के लिए एक सिपाही को जरूर तैनात किया जाता हैं।

दरअसल जोधपुर सैंट्रल जेल में कैदियों का बैंड बजाना सिखाया जाता है। प्रशिक्षण के बाद कैदियों को बकायदा शादियों और पार्टियों में बैंड वादन के लिए भेजा जाता है। इस बैंड दल में 12 कैदी होते हैं और बाजार में जहां एक बैंड 20-30 हजार रूपए प्रति घंटा चार्ज करते है, वहीं कैदियों के इस बैंड का प्रतिघंटे का चार्ज सिर्फ 1601 रूपए है।

कैदियों का यह बैंड काफी लोकप्रिय हो गया है और इस सीजन में इसकी लगातार एडवांस बुकिंग चल रही है।

सेंट्रल जेल में इसकी बुकिंग होती है। बुकिंग की तारीख, समय पहले बताना होता है। बैंड के दल को कार्यक्रम स्थल पर लाने-ले जाने की जिम्मेदारी बुकिंग करने वाले की होती है।

बैंड में उन कैदियों को शामिल किया जाता है जो एक बार पैरोल पर रिहा होकर वापस जेल में आ जाते हैं। यहां बैंड की ट्रेनिंग भी कैदी ही देते हैं। एक कैदी दूसरे कैदी को बैंड दल के लिए तैयार करता रहता है। कार्यक्रम में पहनने वाली ड्रेस जेल प्रशासन की ओर से उपलब्ध करवाई जाती है। राजस्थान हाईकोर्ट के कार्यक्रमों में भी यह बैंड जाता है।

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