जयपुर, ब्‍यूरो। राजस्थान में पंचायत चुनाव और सरकारी नौकरियों में दो बच्चों की अनिवार्यता समाप्त करने की मांग उठ रही है। इस मामले में सत्तारूढ़ भाजपा के विधायक और कई गैरसरकारी संगठन एक ही सुर में बात कर रहे हैं। गैरसरकारी संगठन सरकार के मौजूदा उदयपुर दौरे में मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे को ज्ञापन देने और दबाव बनाने की तैयारी कर रहे हैं।

राजस्थान में 1992 से पंचायतों और नगरीय निकायों में दो से अधिक बच्चे होने पर चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध है! इसके बाद 2002 में इसे सरकारी नौकरियों के मामले में भी लागू कर दिया गया। जयपुर में रविवार को सामाजिक संगठनों की बैठक में इस मुद्दे को लेकर सरकार पर दबाव बनाने की रणनीति तैयार की गई। राजस्थान में नवंबर में स्थानीय निकाय और जनवरी में पंचायतों के चुनाव होने हैं और कोशिश की जा रही है कि चुनाव से पहले सरकार पर दबाव बनाकर इस नियम को खत्म कराया जाए।

सेंटर फॉर हेल्थ एंड सोशल जस्टिस और दो बच्चों की अनिवार्यता नियम के विरोध में बने साझा मंच की कार्यक्रम अधिकारी निबेदिता फूकन और राजस्थान में बाल अधिकार संरक्षण साझा अभियान के विजय गोयल सहित इस मुहिम से जुड़े कई सामाजिक कार्यकर्ताओं का मानना है कि इस नियम के कारण कन्या भ्रूण हत्या के मामले बढ़ रहे हैं। इस नियम का जनसंख्या रोकने के मामले में कोई बड़ा फायदा नहीं हुआ है, बल्कि इसके सामाजिक दुष्प्रभाव ज्यादा सामने आए हैं और महिलाओं की स्थिति बिगड़ी है। राजस्थान विधानसभा में भी पिछले दिनों यह मामला उठ चुका है।

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