अजमेर। सिन्ध के बिना हिन्द की कल्पना अधूरी है। मौजूदा रक्षा नीति पर चर्चा करेंगे तो हमें सिन्ध व महाराजा दाहरसेन को समझना होगा। सिन्ध जहां वेदों की रचना हुई जहां का वास्तुशास्त्र पूर्ण विकसित था और देश के राष्ट्रगान में सिन्ध है यानी सिन्ध हमारा अभिन्न अंग है। यह विचार महाराजा दाहरसेन के 1351वीं जयंती पर Online राष्ट्रीय परिचर्चा में मुख्य वक्ता के रूप में बोलते हुए पूर्व सांसद ओंकारसिंह लखावत ने प्रकट किये। परिचर्चा का आयोजन सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन विकास व समारोह समिति द्वारा किया गया था।

लखावत ने कहा कि सिन्ध, सिन्धु व हिन्दुस्तान में कोई विभाजन नहीं दिखता। देश की संसद ने ऐसी भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में सम्मिलित किया जो प्रदेश हमारे पास नहीं है। उन्होंने सिन्धी भाषा के सर्वंद्धन के लिये सब को मिलकर प्रयास करने पर जोर दिया। लखावत ने कहा कि महाराजा दाहरसेन स्मारक अजमेर देश दुनिया में एक प्रेरणा का केन्द्र बना है।

महामण्डलेश्वर हंसराम उदासीन ने आशीर्वचन देते हुये कहा कि वर्तमान परिस्थिति में सिन्ध मिलकर अखण्ड भारत बनेगा और सिन्ध में जो हिन्दुओं पर अत्याचार हो रहे हैं उसके खिलाफ भारत सरकार गंभीरता से कदम उठाने चाहिए। वहां से प्रताड़ित होकर आने वाले नागरिकों को नागरिकता देने का कार्य हो रहा है वह निश्चित ही सराहनीय है। महाराजा दाहरसेन के जीवन पर आयोजित परिचर्चा से युवाओं को प्रेरणा मिलेगी। वरिष्ठ साहित्यकार श्याम सुन्दर भट्ट उदयपुर ने कहा कि सिन्ध की सीमायें वर्तमान अफनागिस्तान सहित दुनिया के कई देशों से मिलती थीं और विदेशी आक्रमणकारी कभी भी युद्ध जीतकर आगे नहीं बढ़ सके। महाराजा दाहरसेन ने अन्य राजाओं से मिलकर विदेशियों को खदेड़ा और इस पर शोध निरंतर जारी है।

इण्डस वैली रिर्सच इंस्ट्टीयूट के निर्देशक रघुवीर सिंह सोढा जोधपुर ने कहा कि वर्तमान सिन्ध व हिन्द में कई समानतायें हैं जो हमारी संस्कृति को जोड़े है। दुनिया में कहीं भी हम रहे सिन्ध की पवित्र संस्कृति से ही हमारी पहचान बनी है और व्यापार के साथ विश्व बन्धुत्व को समझा है।

शुरूआत में चर्चा का संचालन समिति के कवंल प्रकाश किशनानी ने किया। उन्होंने कहा कि महाराजा दाहरसेन के बलिदान दिवस, जयंती व अन्य कार्यक्रमोें के माध्यम से देश दुनिया में युवाओं तक जुड़ने का प्रयास है। भारतीय सिन्धु सभा के राष्ट्रीय मंत्री महेन्द्र कुमार तीर्थाणी ने आभार प्रकट किया।

आज जयंती कार्यक्रम

समन्वयक मोहन तुलस्यिाणी ने बताया कि कल 25 अगस्त सुबह 9 बजे से महाराजा दाहरसेन के 1351वीं जयंती के उपलक्ष में सिन्धुपति महाराजा दाहरसेन स्मारक, अजमेर पर हिंगलाज माता पूजन के साथ महाराजा दाहरसेन की मूर्ति पर श्रृद्धासुमन अर्पित किये जायेंगे।

Posted By: Navodit Saktawat

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