श्रीनाथजी भगवान श्रीकृष्ण के अवतार है। भगवान श्रीनाथजी सात साल के बालक के अवतार में राजस्थान के नाथद्वारा शहर में स्थित मंदिर में विराजमान है। श्रीनाथ जी का यह मंदिर उदयपुर से उत्तर पूर्वी दिशा में 48 किमी की दूरी पर स्थित है। श्रीनाथद्वारा में कृष्ण के जन्म का स्वागत एक अनोखे ढंग से किया जाता है। यहां 21 तोपों की सलामी देकर उनका जन्मोत्सव मनाया जाता है। कृष्ण जन्माष्टमी मनाने की परंपरा सालों से यहां इसी तरह चली आ रही है। यहां पर 400 साल पुरानी तोपों से 21 सलामी भगवान् को दी जाती है और इन तोपों से गोलों को उसी परम्परा और विधि से दागा जाता है जैसा सालों पहले इनसे दागा जाता था। इन तोपों से गोले भगवान् श्रीनाथ जी के गार्ड ही दागते हैं।

श्रीनाथजी मंदिर में भगवान श्री कृष्ण की काले रंग की संगेमरमर की मूर्ति है। इस मूर्ति को केवल एक ही पत्थर से बनाया गया है। इस मंदिर में भगवान श्री कृष्ण गोवर्धन पर्वत को अपने एक हाथों पर उठाए दिखाई देते है और दूसरे हाथ से भक्तों को आशीर्वाद देते हुए नजर आते हैं। इस मंदिर के अंदर जाने के लिए तीन प्रवेशद्वार बनाए गए है। एक प्रवेशद्वार केवल महिलाओ के लिए बनाया गया है जिसे सूरजपोल कहते है।

माना जाता है कि मेवाड़ के राजा इस मंदिर में मौजूद मूर्तियों को गोवर्धन की पहाड़ियों से औरंगजेब से बचाकर लाए थे। ये मंदिर 12वीं शताब्दी में बनाया गया था।

नाथद्वारा में मान्यता है कि जब औरंगजेब श्रीनाथ जी की मूर्ति को खंडित करने मंदिर में आया था तो मंदिर में पंहुचते ही अँधा हो गया था। तब उसने अपनी दाढ़ी से मंदिर की सीढियाँ साफ़ करते हुए श्रीनाथ जी से विनती की और वह ठीक हो गया। उसके बाद औरंगजेब ने बेशकीमती हीरा मंदिर को भेंट किया जिसे हम आज श्रीनाथ जी के दाढ़ी में लगा देखते है।