जयपुर। राजस्थान के झुंझुनूं में सांप्रदायिक सद्भाव की अनोखी मिसाल देखने को मिली है। झुंझुनूं की कमरूद्दीन शाह दरगाह के गद्दीनशीन एजाज नबी ने नवरात्र के अंतिम दिन भगवा कपड़े धारण कर मंदिर गए और मां दुर्गा की आरती भी की। कमरूद्दीन शाह की दरगाह झुंझुनूं की सबसे बड़ी दरगाह है। दरगाह के प्रमुख एजाज नबी ने नवरात्र महोत्सव के मौके पर नगर पालिका के पूर्व सभापति खालिद हुसैन व अन्य अल्पसंख्यकों के साथ मां दुर्गा की आरती की। इस अवसर पर झुंझुनूं के जिला कलेक्टर रवि जैन भी मौजूद थे।

इस मौके पर एजाज नबी ने मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि नवरात्र हो या होली-दीपावली वह हमेशा हिंदू भाइयों के त्योहारों में शरीक होते हैं। यही सूफी परंपरा का संदेश है और हर साल मां दुर्गा के दर्शन-पूजन का मौका मिलना मेरी खुशनसीबी है।

वहीं पशु बलि पर रोक के बावजूद राजस्थान में चित्तौड़गढ़ जिले के एक मंदिर में एक भैंसे की बलि चढ़ाई गई। बलि के समय बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। पशु बलि का मामला सामने आने के बाद जिला कलेक्टर चेतन देवड़ा एवं पुलिस अधीक्षक अनिल कायल ने जांच के आदेश दे दिए हैं। जानकारी के मुताबिक चित्तौड़गढ़ जिले के आकोला पुलिस थाना क्षेत्र में पहाड़ी पर स्थित चामुंडा माता मंदिर में सोमवार शाम को करीब पांच हजार लोगों की मौजूदगी में बलि दी गई । भैंसे की बलिके वक्त स्थानीय सरपंच और उपसरपंच भी मौजूद थे, लेकिन परंपरा के नाम पर उन्होंने इसे रोकने का प्रयास नहीं किया।

आकोला पुलिस थाना अधिकारी रमेश मीणा ने बताया कि बलि के मामले की जानकारी जुटाई जा रही है और इस संबंध में लोगों से पूछताछ की जा रही है। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके खिलाफ कार्रवाई होगी।

स्थानीय लोगों ने बताया कि यहां मान्यता है कि मंदिर में बलि के बाद यदि कटा सिर हुआ भैंसा पहाड़ी से लुढ़कता हुआ नीचे आ जाता है तो अगले साल क्षेत्र में अच्छी बारिश और खेती होती है । इसके विपरित यदि भैंसा बीच में ही पहाड़ी पर अटक जाता है तो इसे बारिश और खेती के लिए अशुभ संकेत माना जाता है । नवरात्र में हर साल इस मंदिर में भैंसे की बलि देने की परंपरा बरसों से चली आ रही है, लेकिन पिछले दो साल से प्रशासन की सख्ती की वजह से ऐसा नहीं हो सका था।

Posted By: Yogendra Sharma