जोधपुर (ब्यूरो)। जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में छात्रसंघ चुनाव के लिए नामांकन गुरूवार, 22 अगस्त, 2019 को भरे जाएंगे। इस चुनाव के लिए एनएसयूआई,एबीवीपी और एसएफआई सहित तमाम छात्र संगठनों के उमीदवारों ने जीत हासिल करने के लिए अपनी पूरी ताकत झौक दी है। इन तमाम छात्रसंघटनों के बीच मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृहनगर में एनएसयूआई जीत की हेट्रिक की कोशिश में है, तो एबीवीपी भी इस जुगाड़ में है कि किसी तरह उसे जीत मिल जाए। जेएनवीयू में बागी भी इस बार अपनी तगड़ी मौजूदगी दर्ज करवा रहे है।

एक तरफ प्रदेश के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के गृह नगर होने के कारण और उनका खुद का छात्र राजनीति है भरा जीवन होने के नाते जोधपुर में छात्रसंघ चुनावों का शुरू से ही क्रेज रहा है वही भारतीय जनता पार्टी के जोधपुर के सांसद और जल शक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह के स्वयं एबीवीपी से पूर्व में अध्यक्ष रहने के कारण छात्रों में जोश है। दोनों ही छात्र संघटनों से जुड़े छात्र इन दिग्गजों में रोल मॉडल के रूप में अपना भी भविष्य देखते हैं।

एनएसयूआई ने अध्यक्ष पद पर हनुमान तरड को अपना उम्मीदवार घोषित किया है और तीसरी बार हैट्रिक लगाने के मंसूबे पाले है। वहीं एबीवीपी के उमीदवार त्रिवेंनद्रपालसिंह जीत हासिल करने की कोशिश में लगे है। लेकिन एबीवीपी के बागी रविन्द्रसिंह भाटी एबीवीवी के परंपरागत वोट और जातीय समीकरण साध कर उनकी गणित बिगाडने में ताकत लगाए है। इधर एसएफआई के उमीदवार अजयसिंह माली और दलित वोटों के भरोसे जीत का सपना संजोए।

जिस तरह जोड़-तोड़ की राजनीति चल रही है एसपफआई उमीदवार एनएसयूआई की गणित गडबडा सकते है। हालांकि चुनाव में सीधा मुकाबला एनएसयूआई और निर्दलीय के रूप में चुनाव लडने की तैयारी कर रहे रविन्द्रसिंह भाटी के बीच रहने की संभावना अभी से नजर आ रही है। जेएनवीयू में पिछले दो सालों से एनएसयूआई का दबदबा कायम है। लगातार तीन साल एबीवीपी के हैट्रिक लगाने के बाद 2017 में कांता गवाला ने एनएसयूआई को जीत दिलाई थी।पिछले साल महज नौ वोटों से एनएसयूआई के उमीदवार सुनील चौधरी एबीवीपी के मूलसिंह से चुनाव जीते थे। इस वजह इस बार एनएसयूआई हैट्रिक लगाने में पूरी ताकत लगा रही है।

एनएसयूआई के पदाधिकारियों के अलावा किसान छात्रसंघ के पदाधिकारी भी हनुमान तरड को जीत दिलाने में जुटे है लेकिन पिछले चुनाव मेंं टिकट नहीं मिलने पर एबीवीपी छोडकर एनएसयूआई की टिकट पर चुनाव जीते महासचिव इस बार अपने सजातीय एसएफआई के अजयसिंह टाक का समर्थन करते हुए उन्हें चुनाव जीताने में ताकत लगाए है। वहीं पिछले चुनाव में कम मार्जिन से चुनाव हारे मूलसिंह एबीवीपी के त्रिवेंन्द्रपालसिंह के साथ चुनाव जीतने की पूरी रणनीति संभाले है ।लेकिन एबीवीपी से टिकट नहीं मिलने पर बतौर निर्दलीय चुनाव लडने की तैयारी कर रहे रविन्द्रसिंह भाटी एबीवीपी को नुकसान पहुंचा सकते है। उन्हें पूर्व अध्यक्ष कुणालसिंह का समर्थन होने के साथ अन्य राजपूत संघटनों से भी समर्थन मिलने से वे एबीवीपी के परंपरागत राजपूत वोटवैंक पर सेंघमारी कर सकते है।

चुनाव परिदृश्य और जातीय गणित देखे तो इस बार दलित वोटर्स का जिस उमीदवार को समर्थन मिलेगा,उसकी जीत तय है। इस वजह से सभी उमीदवार दलित वोटर्स को रिझााने की पूरी कोशिश कर रही है।