जयपुर। कोटा के जेके लोन अस्पताल में सौ बच्चोंं की मौत के मामले में केन्द्रीय जांच टीम की रिपोर्ट में सामने आया है कि 63 प्रतिशत बच्चों की मौत भर्ती होने के 24 घंटे के भीतर हो गई थी। केन्द्रीय जांच टीम की यह रिपोर्ट राज्यसभा में सांसद सुशील कुमार गुप्ता के एक प्रश्न के जवाब में सामने आई है।

सांसद ने केन्द्र सरकार से पूछा था कि क्या कोटा के जेके लोन अस्पताल में कोई केन्द्रीय जांच दल भेजा गया था और यदि गया था तो जांच रिपोर्ट में क्या सामने आया। इसके जवाब केन्द्र सरकार के स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने बताया है कि जोधपुर स्थित एम्स और स्वास्थ्य मंत्रालय के विशेषज्ञों की टीम को कोटा भेजा गया था। टीम ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यहां हुई 100 बच्चो की मौतों में से 70 की मौत नियोनेटल इंटेसिव केयर युनिट (एनआईसीयू) मे और 30 बच्चो की मौत पीडियाट्रिक इंटेसिव केयरयुनिट में हुई थी।

मौत का शिकार हुए ज्यादा नवजात बच्चों का वजन बहुत कम था। वहीं 63 प्रतिशत बच्चो की मौत अस्पताल में भर्ती कराने के 24 घंटे के भीतर हो गई थी। ज्यादातर बच्चे बूंदी और बारां के जिला अस्पतालों से रैफर हो कर आए थे। रिपोर्ट में अस्पताल में संसाधनोंं की कमी के बारे में बताते हुए कहा गया है कि एनआईसीयू में क्षमता से 125 प्रतिशत और पीआईसीयू में क्षमता के मुकाबले 186 प्रतिशत ज्यादा बच्चे थे, इसके चलते एक शैयया पर दो से ज्यादा बच्चे थे।

वहीं बच्चोंं की देखरेख के लिए एनआईसीयू में दस तथा पीआईसीयू मे छह शैययाओं पर एक नर्स थी, जबकि नियम दो शैययाओं पर एक नर्स का है। अस्पताल के ज्यादातर उपकरण खराब पडे थे और अस्पताल में उपकरणों के मेन्टेनेंस की कोई नीति भी नहीं थी। टीम ने अस्पताल में मूलभूत सुविधाओं में सुधार, पर्याप्त कर्मचारी और नियमों के अनुसार सुविधाएं विकसित करने का सुझाव दिया है। इसके साथ ही जिला स्तर पर भी स्वास्थ्य सेवाएं सुधारने का सुझाव दिया गया है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष दिसम्बर में कोटा के जेके लोन अस्पताल में सौ बच्चोंं की मौत से खासा बवाल मचा था और इसके चलते राजस्थान सरकार की काफी किरकिरी हुई थी। विपक्ष ही नहीं खुद सरकार के उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करने की बात कही थी। हालांकि यह मामला सामने आने के बाद सरकार ने इस अस्पताल के लिए अलग से योजना बनाने के निर्देश दे दिए थे और उपकरणों के लिए पैसा भी आवंटित किया गया था।

Posted By: Navodit Saktawat

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