नई दिल्ली. आम चुनावों के बीच अजमेर शरीफ में हो रहे सालाना उर्स के लिए पाकिस्तानी तीर्थयात्रियों को वीजा देने से इनकार ने भारत-पाक के बीच नया विवाद खड़ा कर दिया है। पाकिस्तान ने विरोध जताते हुए इसे द्विपक्षीय सहमति के विरुद्ध करार दिया है।

उसने इस्लामाबाद में भारतीय उप-उच्चायुक्त को तलब कर इस पर नाराजगी दर्ज कराई है। भारत ने आम चुनावों के बीच माकूल व्यवस्था की कमी का हवाला देकर वीजा देने में असमर्थता जताई है। साथ ही ऐन मौके पर विवशता के अपने फैसले पर खेद भी जताया है।

भारतीय खेमे के मुताबिक, देश में जारी आम चुनावों और सरकारी स्तर पर इंतजामों को देखते हुए पाक तीर्थयात्रियों का वीजा टालने का फैसला किया गया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता के मुताबिक, खेद है कि अजमेर में 1-12 मई के बीच हो रहे उर्स में पाक के तीर्थयात्रियों की शिरकत नहीं करा पा रहे।

यह सही है कि वीजा न देने का निर्णय ऐन मौके पर लिया गया। इस संबंध में सारी तैयारियां की जा चुकी थीं। रेल मंत्रालय से अटारी से अजमेर तक विशेष ट्रेन चलाने की स्वीकृति भी मिल गई थी।

भारत ने अजमेर शरीफ उर्स में पाकिस्तानी जायरीन के भाग न ले पाने को लेकर खेद भी जताया। पाकिस्तान से 500 तीर्थयात्रियों ने भारत आने के लिए वीजा आवेदन किया था। पाक उच्चायोग के मुताबिक, इस्लामाबाद में भारत के उप-उच्चायुक्त को तलब कर शिकायत दर्ज कराने के साथ ही इसे 1974 में हुए द्विपक्षीय समझौते के भी विरुद्ध बताया।

पाकिस्तान ने आरोप लगाया कि भारत गत एक वर्ष में चार बार पाकिस्तानी जायरीनों को वीजा से इन्कार कर चुका है। इस्लामाबाद ने सीमा के दोनों ओर रिश्तों को सामान्य करने की कोशिशों के लिए भी इसे झटका करार दिया।

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