जयपुर। देश भर में नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर हो रहे विवाद के बीच राजस्थान के टोंक जिले के नटवाडा गांव में पाकिस्तानी मूल की नीता कंवर सरपंच बनने की तैयारी कर रही है। शुक्रवार को उनके गांव में मतदान होना है। नागरिकता के लिए उन्होंने लम्बा इंतजार किया है। पिछले वर्ष सितम्बर में ही उन्हें नागरिकता मिली है और इसके बाद वे न सिर्फ खुश है, बल्कि सरकार को भी धन्यवाद भी दे रही है। जानिये इस महिला की कहानी।

राजस्थान के टोंक जिले के निवाई उपखण्ड में नटवाडा एक ग्राम पंचायत है और नीता कंवर के ससुर ठाकुर लक्ष्मण करण राठौड यहां तीन बार सरपंच रह चुके है। इस बार यहां की सीट सामान्य महिला वर्ग के लिए आरक्षित है और अपने ससुर की प्रेरणा और सहयोग से इस बार नीता कंवर चुनाव मैदान में है। नीता के पिता पाकिस्तान के सिंध प्रांत के मीरपुर खास में रहते है। नीता 2001 में अपनी आगे की पढाई और शादी के लिए जोधपुर में अपने चाचा नखत सिंह सोढा के यहां आ गई थी। फिर वे अजमेर आ गई और यहां के सोफिया काॅलेज से उन्होंने ग्रेजुएशन किया।

8 साल के इंतज़ार के बाद मिली नागरिकता

वर्ष 2011 में उनकी शादी नटवाडा के पुण्य प्रताप करण से हो गई। शादी के बाद उन्होंने टोंक में ही अपनी नागरिकता के लिए आवेदन किया और लम्बे इंतजार के बाद सितम्बर 2019 में उन्हें नागरिकता मिली। नीता बताती हैं कि टोंक में उनका नागरिकता से जुडा अकेला आवेदन था, इसलिए यहां के अधिकारी इस प्रक्रिया को ज्यादा जानते नहीं थे। यही कारण रहा कि उन्हें नागरिकता के लिए काफी इंतजार करना पडा।

नागरिकता संशोधन एक्‍ट पर देश के माहौल पर यह कहा

देश में नागरिकता संशोधन एक्‍ट को लेकर हो रहे विरोध पर उन्होंने खुल कर कुछ नहीं कहा, लेकिन इतना जरूर बोली कि नागरिकता हासिल करना काफी परेशानी भरा काम है। मैंने भी यह परेशानी देखी है। उन्होंने कहा कि सिंध मंें राजपूत सोढा परिवार काफी संख्या में है और हमारे यहां अपनी ही बिरादरी में शादी नहीं कर सकते, इसलिए हमें यहां आना ही होता है। दूसरे लोगों के अपने कारण होते है, लेकिन किसी की भावना गलत नहीं होती। सब यहां आकर अच्छा काम करना चाहते है। हमारा किसी से विरोध नहीं है। यह एक तरह से सहयोग है।

सरकार को दिया धन्‍यवाद, कहा अब आगे यह है लक्ष्‍य

इस सरकार के समय मुझे नागरिकता मिली, इसके लिए मैं इस सरकार का धन्यवाद करती हूं। नीता ने कहा कि अब नागरिकता के मिलने के बाद मैं यहां चुनाव लड पा रही हूं और अपने गांव व देश के लिए कुछ बेहतर करने की मेरी इच्छा है। मैं यहां शिक्षा और स्वास्थ्य के लिए काम करना चाहती हूं और अपने ससुराल वालों का धन्यवाद करती हूं कि अपनी बहु को आगे लाकर समाज के लिए प्रेरणादायी काम कर रहे है। नीता की बडी बहन अंजना की शादी जोधपुर में हुई है और उन्हें भी नागरिकता मिल चुकी है।

Posted By: Navodit Saktawat

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