मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान में सरकार अब सेक्स सोर्टेंड सीमन योजना लागू करने की तैयारी कर रही है। यह कृत्रिम गर्भाधान की ऐसी तकनीक है, जिससे सिर्फ मादा गौवंश यानी बछिया ही पैदा होती है। यह योजना दो जिलो जोधपुर और झुंझुनूं में पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चल रही थी, अब इसे पूरे प्रदेश में लागू करने की योजना है। राजस्थान में पशुपलान एक बडा व्यवसाय है। हर दूसरे वर्ष अकाल की मार झेलने वाले राजस्थान के किसानों के लिए पशु आजीविका का बडा साधन है। प्रदेश में करीब 1 करोड़ 40 लाख गौवंश है और इसमें एक बडा हिस्सा मादा गोवंश है। दरअसल खेती और पशुपालन के क्षेत्र में अब नर गौवंश की उपयोगिता कम होती जा रही है, क्योंकि खेती में अब हर काम के लिए मशीनें आ गई है।

वहीं कृत्रिम गर्भाधान की भी आधुनिक तकनीकें विकसित होती जा रही है। इसके अलावा सांड और बैल गांव और शहरों मंे जब खुले छोड दिए जाते हैं तो दुर्घटनाओं का कारण भी बनते है। जयपुर में तो पिछले वर्ष दो बार ऐसी घटनाएं हुई जब सडक पर बेसहारा घूमते सांड के चलते लोगों को अपनी जान गंवानी पडी। इनमें से एक तो विदेशी था।

किसान और पशुपालक के लिए मादा गौवंश ही ज्यादा उपयोगी होता है। मादा गौवंश की संख्या बढाने के लिए सेक्स सोर्टेड सीमन पशुपालकों को दिए जाने की योजना लागू किए जाने की तैयारी की जा रही है। राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने इस वर्ष के बजट में इस योजना को लागू करने की घोषणा की थी और इसके लिए दस करोड रूपए का प्रावधान भी किया गया था। इसी आधार पर राजस्थान के गोपालन निदेशालय ने इसका प्रस्ताव बना कर सरकार को भेजा है। शेष राशि सरकार वहन करेगी। विभाग के अतिरिक्त निदेशक डाॅ लाल सिंह ने बताया कि हमने प्रस्ताव बना कर सरकार को भेजा है। प्रशासनिक स्वीकृति मिलते ही इसे लागू किया जाएगा।

क्या है सेक्स सोर्टेड सीमन- यह कृत्रिम गर्भाधान की ऐसी तकनीक है, जिसके जरिए वीर्य में से उन शुक्राणुओं को छांट लिया जाता है, जिनसे मादा गौवंश की उत्पत्ति की सम्भावना होती है। बताया जाता है कि इस तकनीक से मादा गोवंश के पैदा होने की सम्भवना 90-95 प्रतिशत तक होती है। यह बहुत उच्चस्तरीय तकनीक है, जो अमेरिका ने विकसित की थी। भारत में कुछ निजी कम्पनियां यह काम कर रही है।

योजना को लागू करने के लिए इन कम्पनियों से ही सीमन लिए जाएंगे और किसानों को रियायती दर पर उपलब्ध कराए जाएंगे। एक सीमन स्ट्राॅ की कीमत करीब एक हजार रूपए पडती है। विभाग ने इस योजना को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में झंुझुनूं जिले में संकर गौवंश और जोधपुर में देशी थारपारकर गौवंश के लिए लागू किया था और इसके परिणाम काफी उत्साहजनक रहे है।

Posted By: Navodit Saktawat

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