जयपुर। राजस्‍थान सरकार ने जोधपुर, जयपुर एवं कोटा के नगर निगमों के बंटवारे का निर्णय लिया है। इस निर्णय से असहमति जताते हुए भाजपा ने कहा है कि ये केवल हथकंडे हैं। भाजपा ने इस फैसले का विरोध किया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने कहा कि सरकार हर रोज फैसले बदल रही है और भ्रम का शिकार है। पहले सरकार ने भाजपा के बढ़ते प्रभाव के डर से प्रत्यक्ष चुनाव का फैसला बदला।

उन्होने कहा कि ऐसे फैसलों में अच्छी कार्ययोजना और जनता की राय जरूरी होती है। वहीं मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि दिल्ली में भी पांच वर्ष पहले तीन निगम बनाए गए थे। बड़े शहरों में प्रशासनिक दृष्टि से यह ठीक माना जाता है। इसी दृष्टि से यह फैसला किया गया है। वार्ड छोटे होंगे तो पार्षद जनता से ज्यादा जुड़ाव महसूस करेंगे।

लम्बे समय से थी चर्चा- निगमों के बंटवारे की चर्चा काफ लम्बे समय से थी। जब सरकार ने निकायों का परिसीमन कर वार्डो की संख्या बढ़ाई थी, तभी यह माना जा रहा था कि दो निगम बनाए जा सकते हैं लेकिन उस समय यह चर्चा सिर्फ जयपुर के बारे में थी।

इसका एक कारण जयपुर के परकोटा क्षेत्र को यूनेस्को की विश्व विरासत सूची में शामिल करना भी था। यह माना गया था कि यह खिताब बनाए रखने के लिए सिर्फ परकोटा क्षेत्र के लिए अलग निगम होना चाहिए जो सिर्फ इसी क्षेत्र पर फोकस कर काम करे। अब सरकार ने जयपुर के साथ जोधपुर और कोटा को भी शामिल कर लिया है।

जोधपुर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृहनगर है, वहीं कोटा स्वायत्त शासन मंत्री शांति धारीवाल का गृहनगर है। ऐसे में इन तीनों शहरों में दो निगमो का फैसले के राजनीतिक अर्थ भी निकाले जा रहे है और माना जा रहा है कि इन शहरों में कांग्रेस ने अपना राजनीतिक वर्चस्व बनाए रखने के लिए यह फैसला किया है।

Posted By: Navodit Saktawat