मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान के अलवर जिले में सोमवर को एक अनूठी शादी हुई। इस शादी मे लगभग हर काम के पीछे एक संदेश छिपा था। यहांं एक लड़की बारात लेकर पहुंची, संविधान को साक्षी मान कर शादी हुई और मेहमानों को उपहार के रूप में संविधान की किताब और एक पौधा दिया गया। यह शादी अलवर जिले किशनगढ़ बास के पास स्थित गांव कारोली में हुई। दूल्हा थे अजय जाटव जो हैदराबाद में टाटा एयरोस्पेस कम्पनी मे काम करते हैंं, वही दुल्हन बबीता अभी पढ़ाई कर रही है। अजय के दो भाई और एक बहन भी है और मां है, पिताजी नहीं हैंं। अजय ने अपनी शादी में लगभग सभी तरह सामाजिक परम्पराओं को बदला और आज उनकी शादी पूरे इलाके में चर्चा का विषय बनी हुई है।

अजय ने बताया कि उन्होंने शादी के लिए आठ-दस नई बातें सोची थींं और उन्हीं पर अमल भी किया। हालांकि यह आसान नहीं था, क्‍योंकि राजस्थान के गांवों में अनुसूचित जाति के परिवारों में दूल्हे की घुडचढ़ी पर ही विवाद हो जाता है, लेकिन अजय ने दुल्हन को अपने यहां बुलाया। दुल्हन एक बग्‍घी में सवार होकर बारात के साथ दूल्हे के घर पहुंची और यहां उसका जोरदार स्वागत किया गया। शादी में कोई दहेज नहीं लिया गया और शादी में आए मेहमानों को संविधान की किताब और एक-एक पौधा देकर विदा किया गया। शादी में प्लास्टिक का इस्तेमाल भी नहीं हुआ। स्टील के बर्तन और कुल्हड़ का उपयोग किया गया।

अजय ने बताया कि हम महिलाओं को समान अधिकार देने की बात तो करते हैंं, लेकिन उस पर अमल नहीं करते। मैंने इस शादी के जरिए यह कोशिश की है। उन्होंने बताया कि यह सब आसान नहीं था। परिवार और समाज को काफी मुश्किलोंं से समझाया, लेकिन सब मान गए और खुशी खुशी शादी मे शामिल हुए।

इसलिए अनूठी रही शादी

- हिन्दू परिवारों में देवोत्थान एकादशी के बाद शादी होती है, लेकिन इस परिवार ने बिना किसी मुहूर्त के शादी करना तय किया

- शादी का कार्ड कागज पर नहीं बल्कि रूमाल पर छपवाया गया। दो धुलाई के बाद इस रूमाल को सामान्य तौर पर काम लिया जा सकता है। ज्यादातर लोगों को ई-कार्ड के जरिए निमंत्रित किया गया

- शादी के कार्ड में परिवार की महिलाओं के नाम पुरुषों से पहले दिए गए।

- शादी में कोई पंडित नहीं था। संविधान को साक्षी मान कर शादी की गई।

- शादी के मौके पर गांव में सार्वजनिक पुस्तकालय बनाने की घोषणा की गई। यह पुस्तकालय कुछ दिन में बन कर तैयार हो जाएगा।

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Posted By: Navodit Saktawat