मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान में दो विधानसभा सीटों के लिए सोमवार 21 अक्टूबर को होने वाले मतदान से ऐन पहले सत्तारूढ कांग्रेस में निकाय चुनाव को लेकर सामने आई कलह से भाजपा काफी उत्साहित है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने तो यहां तक कहा कि सरकार के विभाजन की आशंका नजर आ रही है और सरकार खुद ही दो भागों में बंटी हो वह जनता का भला नहीं कर सकती।

राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर सरकार के फैसलो से सरकार के कुछ मंत्री और उपमुख्यमंत्री तथा प्रदेश अध्यक्ष सचिन पायलट खुश नहीं है। मंत्रियों और पायलट ने अपनी नाखुशी शुक्रवार को खुल कर जाहिर भी कर दी। यह सारा घटनाक्रम उस समय हुआ है जब राजस्थान में मण्डावा और खींवसर की विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव का प्रचार अतिम दौर में था। कांग्रेस के शीर्ष नंेतृत्व में आपसी खींचतान लम्बे समय से है, लेकिन निकाय चुनाव को लेकर पिछले तीन दिन में किए गए फैसलों के बाद यह कलह अब पूरी तरह सामने आ गई है और इसने भाजपा को चुनाव से बिल्कुल पहले सरकार पर आक्रामक होने का बहुत अच्छा मौका दे दिया। कुछ समय पहले तक कांग्रेस नेता भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के शपथ ग्रहण समारोह में पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के नहीं आने को लेकर भाजपा में गुटबाजी को मुददा बना रहे थे, लेकिन अब खुद अपनी पार्टी और सरकार में चल रही खींचतान खुल कर सामने आने से चुप्पी साध गए है। उधर भाजपा इसे लेकर बेहद आक्रामक है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने मण्डावा सीट पर प्रचार के दौरान आयोजित सभा में कहा कि प्रदेश सरकार साफ तौर पर दो भागों में बंटी दिख रही है। जिस घर में झगउे और बंटवारा हो वह दूसरे का भला नहीं कर सकता। पूनिया ने कहा कि सरकार के मंत्री ही नहीं उपमुख्यमंत्री भी सरकार के फैसलोें के खिलाफ है। सरकार असमंजस में और अंतरकलह और अंतर्विरोध की स्थिति है और इनके आपस के झगडे से राजस्थान की जनता असमंजस में है। दोनों सीटों के लिए प्रचार आज खत्म हो गया, लेकिन अंतिम दिन भी यही मुददा छाया रहा। जयपुर यात्रा पर आए पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि यह सरकार दो पाटों के बीच फंस गई है जो चीज दो पाटों के बीच फंस जाती है, वह पिस जाती है। यहां एक फूल दो माली वाली स्थिति है। इस सरकार को दो पायलट चला रहे है तो ऐसे में सोचा जा सकता है कि ऐसी सरकार की क्या हालत होनी है। उन्होनंे कहा कि सरकार के उपमुख्यमत्री और पार्टी के अध्यक्ष जब यह कहें कि उन्हें सरकार के फैसलों की जानकारी अखबार से मिली है तो इससे बुरी स्थिति कुछ नहीं हो सकती। भाजपा नेताओं को पूरा भरोसा है कि सरकार की इस आपसी खींचतान का पूरा फायदा उन्हें इस उपचुनाव में मिलेगा, क्योकि यह सारा घटनाक्रम एकदम चुनाव से पहले हो रहा है। पार्टी यह मानकर चल रही हैकि इस घटनाक्रम ने दोनों सीटों पर भाजपा और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के गठबंधन मनोवैज्ञानिक बढत दिलवा दी है और परिणाम में इसका असर नजर आगा।

Posted By: Navodit Saktawat