जयपुर। राजस्थान के जोधपुर में एक आशा कार्यकर्ता की जागरुकता के चलते 23 सदस्यों का एक मुस्लिम परिवार कोरोना संक्रमण की चपेट में आने से बच गया है। कोरोना का हॉट स्पॉट बन चुके जोधपुर शहर के वार्ड नम्बर 52 की कलाल कॉलोनी में सर्वे कार्य में लगी आशा सहयोगिनी रीटा ने सर्वे कार्य के दौरान एक गृहिणी शबाना में कोरोना के कुछ लक्षण देखे तो उसने उसके परिवार को जांच कराने के लिए कहा। पहले तो परिवार ने मना कर दिया, लेकिन रीटा की जिद और समझाइश के बाद परिवार माना और जांच कराई तो शबाना कोरोना पॉजिटिव पाई गई। उस सहित उसके परिवार को क्वारंटीन कर दिया गया। शबाना के परिवार में 23 लोग है। अगर परिवार के सभी सदस्यों की वक्त रहते जांच नहीं होती तो यह पूरा परिवार संक्रमित हो सकता था। आशा कार्यकर्ता रीटा की सजगता से बहुत लोग संक्रमित होने से बच गए।

राजस्थान में रीटा जैसी करीब 65 हजार आशा कार्यकर्ता और करीब 62 हजार आंगनबाडी कार्यकर्ता और सहयोगिनी इसी तरह घर घर सर्वे कर कोरोना संक्रमितों का पता लगा रही है। चिकित्सा विभाग के अधिकारी मानते हैं कि इन जमीनी कार्यकर्ताओं का सहयोग नहीं मिला होता, तो कोरोना संक्रमण की स्थिति और भी खराब हो सकती थी, क्योंकि किसी भी इलाके के बारे में पहली सूचना इन कार्यकर्ताओं के सर्वे से ही मिलती है।

आशा कार्यकर्ता स्वास्थ्य विभाग के अधीन काम करती है। वहीं आंगनबाडी कार्यकर्ता व सहयोगिनी महिला व स्वास्थ्य विभाग के अधीन कार्यरत है, लेकिन कोरोना संकट के समय घर घर सर्वे के काम में सभी का सहयोग लिया जा रहा है। हर कार्यकर्ता प्रतिदिन 30 से 40 मकानों का सर्वे करती है और यह पता लगाती है कि उस परिवार में किसी में खांसी जुकाम जैसी बीमारी तो नहीं है या कोई बाहर से तो नहीं आया है। इसके अलावा इन्हें क्वांरटीन सेंटर्स की व्यवस्थाओं और वहां रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य सर्वे का काम में भी लगाया गया है।

लेकिन कोरोना की लड़ाई में अग्रिम मोर्चे पर काम रही इन आशा और आंगनबाडी कार्यकर्ताओ को बहुत कम मानदेय में यह काम करना पड रहा है। अखिल राजस्थान महिला व बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ (एकीकृत) की प्रदेश अध्यक्ष मधुबाला शर्मा बताती है कि आशा कार्यकर्ता को महिला व बाल विभाग की ओर से ढाई हजार रूपए मानदेय और चिकित्सा विभाग की ओर से 2000 रूपए प्रोत्साहन राशि के रूप में मिलते हैं।

इस तरह करीब साढे चार हजार रूपए में इनको काम करना पड़ रहा है। आंगनबाडी कार्यकर्ता को सरकार सिर्फ साढे सात हजार रूपए मानदेय देती है। इस तरह बहुत कम मानदेय में हमारी कार्यकर्ता बिल्कुल अग्रिम मोर्चे पर काम कर रही है और काम भी काफी ज्यादा व जोखिम भरा है, जबकि हमारे भी परिवार है और हमें परिवार की जिम्मेदारियां भी निभानी पड़ती है।

Posted By: Neeraj Vyas

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