जयपुर। भारत माला प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली से मुम्बई के बीच बन रहे दिल्ली-मुम्बई एक्सप्रेस वे के लिए किए जा रहे भूमि अधिग्रहण के खिलाफ तीन राज्यों राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के किसान एकजुट हो गए है। तीनों राज्यों के किसानों का कहना है कि सरकार भूमि अधिग्रहण के लिए पर्यापत मुआवजा नहीं दे रही है। ऐसे में तीनों राज्यों के किसानों ने एक सयंुक्त मोर्चे का गठन किया है और अब आंदोलन की तैयारी की जा रही है।

दिल्ली मुम्बई एक्सप्रेस वे दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान मध्य प्रदेश गुजरात होते हुए मुम्बई तक जाएगा। इसके लिए इन सभी राज्यों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। हरियाणा में एक्सप्रेस वे का काम भी शुरू हो गया है, लेकिन भूमि अधिग्रहण के बदले दिए जा रहे मुआवजे को लेकर किसानों का अंसतोष सामने आ रहा है। इसे लेकर राजस्थान के दौसा जिले में पिछले दिनों किसान हाइवे जाम कर प्रदर्शन कर चुके है। राजस्थान में किसानों का यह आंदोलन चला रहे हिम्मत सिंह ने सोमवार को यहां मीडिया को बताया कि इस एक्सप्रेस वे के निर्माण के लिए राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात के करीब 30 हजार किसानों की जमीन ली जा रही है, लेकिन बदले में हमें नियमानुसार पर्यापत मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि केन्द्र सरकार की गाइडलाइन के अनुसार राज्य की परियोजना के लिए राज्य के नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाना चाहिए और केन्द्र सरकार की ऐसी परियोजना जो कई राज्यों से होकर गुजर रही हो, उसके लिए केन्द्र सरकार के नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाना चाहिए।इस नियम के हिसाब से सभी किसानों को बाजार दर के चार गुणा के हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिए, लेकिन राजस्थान, मध्यप्रदेश और गुजरात की सरकारें राज्य के नियमों के अनुसार दो गुणा तक ही मुआवजा दे रही है। मध्य प्रदेश में तो एक गुणा मुआवजा ही मिल रहा है, क्योंकि वहां यही प्रावधान किया गया है। ऐसे में किसानों को मुआवजे के रूप में ही करोडों का नुकसान हो रहा है। हिम्मत सिंह ने बताया कि इस निमय को लागू किए जाने को लेकर किसानो का साथ न भाजपा दे रही है और न कांग्रेस दे रही है। केन्द्र की भाजपा सरकार अपनी परियोजना के बावजूद राज्यों पर सही मुआवजा देने का दबाव नहीं डाल र ही है, वहीं राजस्थान और मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकारें है, लेकिन ये भी किसानों कीसुनवाई नहीं कर रही है और पहले से तय नियमों के अनुसार ही मुआवजा दे रही है। हिम्मत सिंह ने बताया कि अब हम तीनों जिलों के किसान मिल कर अपनी मांग के लिए आंदोलन करंेंगे। इसके लिए एक संयुक्त किसान संघर्ष मोर्चे का गठन किया गया है और सरकार ने हमारी मांग नहीं मानी तो हम इस एक्सप्रेस वे का निर्माण नहीं होने देंगे।

Posted By: Navodit Saktawat