LIVE Rajasthan Government News Updates : मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान के डिप्टी सीएम और कांग्रेस नेता सचिन पायलट कल होने वाली कांग्रेस विधायक दल की बैठक में शामिल नहीं होंगे। पायलट का कहना है कि 30 से अधिक MLA कांग्रेस के बाद अशोक गहलोत सरकार अल्पमत में है और कुछ निर्दलीय विधायकों ने सचिन पायलट को समर्थन देने का वादा किया है।

राजस्थान में शुक्रवार से शुरू हुई सियासी हलचल रविवार को तीसरे दिन भी जारी रही और इस हलचल में कांग्रेस की आपसी फूट खुलकर सामने आ गई। रविवार को दिन भर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के निवास पर विधायकों और मंत्रियों के आने और अपनी निष्ठा प्रकट करने का सिलसिला चलता रहा, वहीं उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और उनके साथ माने जा रहे विधायकों की तलाश की जाती रही। इस बीच राजस्थान में विधायकों की खरीफ फरोख्त मामले की जांच कर रहे पुलिस के स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट सहित कई विधायकों को पूछताछ के लिए नोटिस जारी किए हैंं। राजस्थान में राज्य सभा चुनाव के दौरान विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप सामने आए थे। अब दो दिन से बार फिर वही सिलसिला चल रहा है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शनिवार को भाजपा पर विधायकों की खरीद फरोख्त के आरोप लगाए थे। यहां पढ़ें लाइव अपडेट्स।

- भारतीय जनता पार्टी राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने यहां जारी एक बयान में कहा कि मुख्यमंत्री उपमुख्यमंत्री को एसओजी की तरफ से नोटिस मिलने से यह साफ है कि कांग्रेस पार्टी में भारी अंतर्विरोध चल रहा है उन्होंने कहा की एक साधारण से डिप्टी एसपी की तरफ से मुख्यमंत्री को नोटिस दिया जाना राजस्थान में पहली बार हुआ है।

- सतीश पूनिया ने कहा किस घटनाक्रम से यह भी साबित हो गया है कि मुख्यमंत्री जांच एजेंसियों के दम पर मंत्रियों और विधायकों को डराना चाहते हैं और अपने पक्ष में करना चाहते हैं।

- विधायकों से बात करने के लिए सोनिया गांधी अजय माकन, अविनाश पांडेय, सुरजेवाला को जयपुर भेज रही हैं। सोमवार सुबह 10 बजे भी मुख्यमंत्री निवास पर होगी विधायक दल की बैठक।

ऐसे बढ़ी कांग्रेस की आपसी खींचतान

शनिवार देर रात और रविवार को यह मामला कांग्रेस की आपसी खींचतान की तरफ मुड़ गया। इस तरह की बातें सामने आई कि कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष और सरकार में उपमुख्यंत्री सचिन पायलट अपने समर्थक विधायकोंं के साथ दिल्ली पहुंच गए हैं और वहां पार्टी आलाकमान से मिलने की तैयारी कर रहे हैंं। शनिवार शाम से ही मुख्यमंत्री निवास पर विधायकों के आने और अपनी निष्ठा प्रदर्शित करने का सिलसिला शुरू हो गया था जो रविवार को भी दिन भर जारी रहा, लेकिन इसमें सचिन पायलट नजर नहीं आए। उनके साथ माने जाने वाले कुछ विधायक भी दोपहर बाद तक मुख्यमंत्री निवास नहीं पहुंचे थे। दोपहर बाद चार बजे तक करीब 40 विधायक मुख्यमंत्री निवास पर पहुंच चुके थे। वहीं कुछ शनिवार को आ गए थे। मुख्यमंत्री की ओर से कांग्रेस और इसके समर्थन वाले विधायकों को रविवार रात निवास पर बैठक और डिनर के लिए बुलाया गया है। इसके बाद मंत्रिमण्डल की बैठक भी होगी। इस बैठक से यह स्पष्ट होगा कि कितने विधायक मुख्यमंत्री के साथ है। मुख्यमंत्री निवास पर पहुंचने वाले विधायकों से कांग्रेस और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के नेतृत्व में निष्ठा होने का पत्र लिया जा रहा है।

पूरा मामला गहलोत बनाम पायलट

सूत्रों का कहना है कि यह मामला अब पूरी तरह से मुख्यमंत्री गहलोत और उपमुख्यमंत्री पायलट के बीच हो गया है और पार्टी की गुटबाजी खुल कर सामने आ गई है। दरअसल यह खींचतान सरकार के गठन के समय से ही चल रही है और अब स्थितियां चरम पर पहुंच गई लग रही है। इसका एक कारण यह बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री गहलोत मंत्रिमण्डल का विस्तार करना चाहते हैंं और इसमें बसपा से कांग्रेस में आए छह विधायकों को भी जगह देना चाहते है, लेकिन पायलट इसके लिए राजी नहीं है। इसके अलावा राजनीतिक नियुक्तियों और कुछ अन्य मुददों को लेकर भी मतभेद हैंं। ऐसे में अब आलाकमान के दखल के बिना यह मतभेद खत्म होने की सम्भावना नजर नहीं आ रही है।

भाजपा के लिए दूर की कौड़ी है यहां तख्ता पलटना

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भाजपा पर सरकार गिराने का आरोप भले ही लगा रहे है, लेकिन राजस्थान विधानसभा में कांग्रेस और भाजपा के बीच विधायकों की संख्या के अंतर को देखते हुए यह आसानी से सम्भव नजर नहीं आ रहा है। राजस्थान में तख्ता पलट तब तक सम्भव नहीं है, जब तक कि लगभग 50 विधायक भाजपा के खेमे में ना आएं। राजस्थान में कांग्रेस के खुद के 100 विधायक है, वहीं उसके पास बसपा से आए छह और राष्ट्रीय लोकदल के एक विधायक का समर्थन हासिल है। इस तरह उसके पास 107 विधायक है। हाल में हुए राज्यसभा चुनाव में उसे निर्दलीय और अन्य दलों के विधायकों को मिला कर कुल 125 विधायकों का समर्थन मिला था।

भाजपा के 72 विधायक

भाजपा की बात करें तो यहां खुद भाजपा के 72 विधायक हैं और इसे समर्थन देने वाली पार्टी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के तीन विधायकों के साथ इसके पास कुल 75 विधायक है। ऐसे में निर्दलीय और अन्य विधायकों को छोड़ भी दिया जाए तो सिर्फ कांग्रेस और भाजपा के विधायकों के बीच ही 28 सीटों का अंतर है। स्थिर सरकार के लिए कम से कम 35 विधायकोंं का समर्थन चाहिए। दल बदल विरोधी कानून के तहत यदि 35 विधायक टूट कर भाजपा में आते हैं तो उनकी सदस्यता चली जाएगी। ऐसे में बहुमत का परीक्षण 165 विधायकों के बीच होगा। इसमें भी भाजपा को बहुमत के लिए 83 विधायक चाहिए होंगे, जबकि उसके पास खुद के 72 ही विधायक हैंं। यानी 11 विधायकों का समर्थन उसे तब भी जुटाना होगा। एक-एक कर इतने विधायक जुटाना सम्भव नहीं है और असंतुष्ट माने जा रहे सचिन पायलट के पास फिलहाल इतने विधायक नजर नहीं आ रहे। ऐसे में संख्या बल के लिहाज से भाजपा के लिए यहां सत्ता परिवर्तन कराना काफी मुश्किल है और कांग्रेस काफी हद तक मजबूत स्थिति में है। यही कारण है कि राजस्थान में चल रही सियासी उठापटक कांग्रेस की अंदरूनी राजनीति से ही जुड़ी दिख रही है।

एसओजी ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री को दिए पूछताछ के नोटिस

विधायकों की खरीद फरोख्त के मामले की जाचं कर रहे राजस्थान पुलिस के स्पेशल आॅपरेशन ग्रुप ने पूछताछ के लिए मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट और दो दर्जन से ज्यादा विधायकों को नोटिस दिए है। इस नोटिस में कहा गया है कि विधायको की खरीद फरोख्त के दर्ज मामले में बयान लिए जाने है। ऐसे में उचित समय, दिनांक और स्थान बताएं ताकि बयान लिए जा सकें। राजस्थान में मुख्यमंत्री के स्तर पर इस तरह की पूछताछ के लिए नोटिस दिए जाने का यह अपने आप मे पहला मामला बताया जा रहा है। इधर इस तरह के नोटिस के बाद पायलट खेमे की तरफ से कुछ नाराजगी की बात भी सामने आई थी। इसे देखते हुए खुद मुख्यमंत्री के टिवटर हैंडल से यह स्पष्ट किया गया कि इस तरह के नोटिस मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री, मुख्य सचेतक व कई विधायको को सामान्य पूछताछ के लिए दिए गए है। गौरतलब है िकइस मामले में एसओजी ने मोबाइल पर हुई बातचीत के आधार पर दो लोगों भरत मालानी और अशोक चैहान को गिरफतार किया है। ये दोनों मार्बल व्यवसायी है और भाजपा से जुडे बताए जा रहे है।

Posted By: Navodit Saktawat

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Ram Mandir Bhumi Pujan
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