मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान राज्य मानवाधिकार आयोग ने देश में तम्बाकू की खेती से लेकर इसके सम्पूर्ण कारोबार पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश की है और यह कहा है कि इसका उल्लंघन करने पर आजीवन कारावास की सजा का प्रावधान किया जाना चाहिये। आयोग ने कहा है कि राजस्व के लिए किसी को कैंसर के बीज बेचने की इजाजत नहीं दी जा सकती। आयोग ने अपनी सिफारिशें केन्द्र सरकार को भेजी हैं। राज्य मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष जस्टिस प्रकाश टाटिया की एकलपीठ ने तम्बाकू कारोबार पर पूर्ण प्रतिबंध के विषय में सभी सम्बन्धित पक्षकारो का पक्ष जानने के बाद यह सिफारिशें की हैं। आयोग ने माना है कि तम्बाकू उत्पादों पर रोक लगाने के बारे में लागू कानून पालना के स्तर पर पूरी विफल रहे हैंं। यही कारण है कि आज देश के हर गली मोहल्ले में तम्बाकू आसानी से उपलब्ध है। आयोग ने कहा है कि पूरी दुनिया में हर वर्ष 80 लाख लोग तम्बाकू के कारण मरते हैं ओर इनमें से 12 लाख ऐसे भी है जो तम्बाकू का सेवन नहीं करते, लेकिन इसके दुष्प्रभावों से इनकी मौत होती है। तम्बाकू के कारण कैंसर जैसा रोग होता है और व्यक्ति मरता है।

आयोग ने कहा है कि एक तरफ तो सरकार सैंट्रल टबेको रिसर्च इंस्टीटयूट तम्बाकू की नई नई किस्में ला रहा है और वही सरकार दावा कर रही है कि हम लोगों को तम्बाकू सेवन से बचने की सलाह दे रहे हैंं ओर लोगों को तम्बाकू से बचाने का प्रयास कर रहे हैंं। आयोग ने माना है कि तम्बाकू पर प्रतिबंध के लिए सरकार ने बेहद कमजोर कानून बनाए हैंं और इसी के चलते भारत दुनिया में तम्बाकू उत्पादन में पहले तीन देशों में शामिल हैंं।

आयोग ने कहा है कि सरकार द्वारा तम्बाकू उत्पादों पर नियंत्रण के लिए बनाए गए “कोटपा“ कानून के लागू होनेे के बाद बीडी सिगरेट के उत्पादन या बिक्री में कमी आने का कोई प्रमाण नहीं है। आयेाग ने कहा है कि तम्बाकू कारोबार के बारे में तम्बाकू उत्पाद बनाने वाली कम्पनियां बेरोजगारी बढने, बेरोजगारों के आतंकी या नक्सली बनने जैसे तर्क देते है, लेकिन आयेाग इन तर्कों को नहीं मानता।

यह की है आयोग ने सिफारिश

- तम्बाकू की खेती और इसके सभी तरह के व्यापार पर प्रतिबंध लगाना भारत सरकार का संवैधानिक दायित्व है।

- कोटपा कानून के प्रावधानों में भारी कमियां है। ऐसे में मानवाधिकारों का उल्लंघन है। इससे भारत के राज्यों में मानवाधिकार का हनन ही नहीं बल्कि मानव जीवन की हानि हो रही है।

- सरकार तम्बाकू उत्पादों से होने वाली आय को महत्व देती है तो उसे तम्बाकू से होने वाली बीमारियों के उपचार पर सरकार और आम जनता द्वारा किए जाने वाले खर्च की गणना भी करनी चाहिए और उस खर्च को भी देखना चाहिए जो बचाव के लिए प्रचार प्रसार पर किया जा रहा है।

- केन्द्र सरकार कोटपा कानून को हटा कर तम्बाकू की खेती से लेकर उत्पादों के व्यापार व सेवन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाए।

- राज्य सरकार अपने अधिकार क्षेत्र में प्रतिबंध लगाने के लिए केन्द्र सरकार के समक्ष अपना पक्ष रखे।

- तम्बाकू की खेती से लेकर इसके उत्पादों के उयोग को दण्डनीय अपराध घोषित किया जाए।

- ऐसे उत्पादों के कारोबार पर आजीवन कारावास के दण्ड का प्रावधान किया जाए।

Posted By: Navodit Saktawat