जयपुर। राजस्थान मे निकाय चुनाव के बाद निकाय अध्यक्ष के चुनाव के लिए नाम वापस लेने का समय शनिवार को पूरा हो गया। कुल 32 लोगों ने नाम वापस लिए हैं। तीन जगह रूपवास, मकराना और निम्बाहेडा में निर्विरोध चुनाव हो गया है। अब 26 नवम्बर को बाकी निकायों में अध्यक्ष पद के लिए चुनाव होगा। इस बीच निकाय अध्यक्ष पद पर कब्जे के लिए पार्षदों को अपने पक्ष में करने की कवायद शनिवार को भी जारी रही।

राजस्थान में 49 निकायों के पार्षदों के चुनाव तो हो गए। अब निकाय अध्यक्षों का चुनाव होना है। इसके लिए नामांकन प्रक्रिया शनिवार को पूरी हो गई। निकाय अध्यक्ष पद के लिए 155 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए थे। इनमें से 16 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र खारिज हो गए। ऐसे में 138 उम्मीदवारों के नामांकन पत्र सही पाए गए। इनमें से 32 ने नाम वापस ले लिए और तीन का निर्विरोध चुनाव हो गया।

ऐसे में अब 103 उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। जिन 46 निकायों में चुनाव होना में उनमें से 37 में दो-दो उम्मीदवारों के बीच मुकाबला है। बाकी जगह औसतन तीन से चार उम्मीदवार चुनाव मैदान में है। सबसे ज्यादा पांच उम्मीदवार चूरू की राजगढ निकाय में है। चार निकायों में पांच प्रत्याशी ऐसे भी है जो निर्वाचित पार्षद नहीं है, लेकिन चुनाव लड़ रहे हैंं। गौरतलब है कि इस बार राजस्थान में जो पार्षद नहीं है, उन्हें भी अध्यक्ष का चुनाव लड़़ने की छूट है।

निकाय अध्यक्ष के इस चुनाव में कांग्रेस ने सभी 49 जगह और भाजपा ने 48 जगह उम्मीदवार खड़े किए थे। ज्यदातर जगह मुकाबला दोनों दलों के प्रत्याशियों के बीच ही होने की सम्भावना है। इस चुनाव में निर्वाचित पार्षद वोट डालेंगे। यही कारण है कि दोनों दल अपने पार्षदो की घेराबंदी में लगे हुए है। यह सिलसिला चुनाव के बाद से ही चल रहा है और निकायों के आस-पास के होटलों और रिसोर्ट में इन पार्षदों को रोका गया है। दोनों दलों के नेता इनकी निगरानी कर रहे हैं। हालांकि इसके बावजूद एक दूसरे के दल में सेंधमारी के प्रयास किए जा रहे हैं।

सबसे ज्यादा भाव निर्दलियों को मिल रहा है। कुल 49 में से 23 निकायों में सत्ता की चाबी निर्दलियोंं के हाथ में है। यही कारण है कि निर्दलियों को अपने साथ मिलाने की कोशिश चल रही है। ब्यावर में भाजपा ने दस निर्दलियों को अपने पक्ष में कर लिया है। अलवर में भी दोनोंं दल अपना-अपना बहुमत होने का दावा कर रहे हैंं। कांग्रेस ने 30 से ज्यादा निकायों में अपना बोर्ड बनने का दावा किया है, जबकि उसका स्पष्ट बहुमत 20 निकायों में ही है। वही भाजपा का स्पष्ट बहुमत 6 निकायो में ही है, लेकिन पार्टी को 15 से ज्यादा निकायों में अपन बोर्ड बनने की उम्मीद है।

तीन जगह निर्विरोध चुनाव, एक भाजपा, दो कांग्रेस के पास- इस बीच नागौर जिले की मकराना, भरतपुर की रूपवास और चित्तौडगढ की निम्बाहेडा में निर्विरोध चुनाव हो गया है। इनमें से रूपवास में भाजपा की बबीता देवी और निम्बाहेडा में कांगेस के सुभाष चंद्र तथा मकराना में कांग्रेस पार्टी की ही समरीन निर्विरोध अध्यक्ष बन गई है। यहां कांग्रेस को पहली बार स्पष्ट बहुमत हासिल हुआ था। हालांकि स्पष्ट बहुमत के बाद भी यहां सभापति की कुर्सी को लेकर कांग्रेस में बगावत हो गई।

कांग्रेस ने मकराना में कांग्रेस जिलाध्यक्ष जाकिर हुसैन गैसावत की पुत्री समरीन को प्रत्याशी बनाया तो कांग्रेस के ही कुछ पार्षदों ने निर्दलीय नामांकन भर दिया था। हालांकि 23 शनिवार को नामांकन वापस लेने के अंतिम दिन सब को मना लिया गया और कांग्रेस की समरीन को निर्विरोध निर्वाचित घोषित कर दिया गया। यही वह निकाय था जहां भाजपा ने अपना कोई प्रत्याशी खड़ा नहीं किया था। रूपवास में कांग्रेस और भाजपा बराबरी पर थे और निर्देलियो को फैसला करना था, वहीं निम्बाहेडा में कांग्रेस के पास स्पष्ट बहुमत था।

Posted By: Navodit Saktawat