जयपुर। राजस्थान के निकाय चुनाव की मतगणना में एक निकाय में एक वार्ड में जीतने वाले प्रत्याशी का फैसला पर्ची निकाल कर लाॅटरी से करना पडा। यह स्थिति श्रीगंगानगर जिले की सूरतगढ़ के वार्ड नंबर 31 में सामने आई। यहां दोनों पार्टियों को बराबर वोट मिले। कांग्रेस के बसंत बोहरा और बीजेपी के अशोक आसेरी दोनों को 363-363 वोट मिले। मुकाबला बराबरी पर रहा तो फैसला पर्ची निकाल कर लाॅटरी के जरिए करना पड़ा और इसमें कांग्रेस के बसंत बोहरा जीत गए। सूरतगढ़ नगरपालिका चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर और एसडीएम मनोज कुमार मीणा ने दोनों उम्मीदवारों की उपस्थिति में पर्ची निकाली। दोनों ही प्रत्याशियों को एक जैसे वोट मिलना चर्चा का विषय बन गया। सूरतगढ़ निकाय चुनाव के रिटर्निंग ऑफिसर मनोज कुमार मीणा ने जैसे ही पर्ची के माध्यम से कांग्रेस के बंसत बोहरा को विजयी घोषित किया कांग्रेस समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। खास बात यह रही कि हारे प्रत्याशी यहां नगर पालिका अध्यक्ष के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे।

जीते पार्षदों के लिए अब सात दिन का राजनीतिक पर्यटन

ज्यपुर। निकाय चुनाव में जीते हुए प्रत्याशियों के लिए अब सात दिन राजनीतिक पर्यटन के है। दोनों दलों ने अपने पार्षदो को तो फाइव स्टार होटलों और रिसोर्ट में भेजा ही है। उन निर्दलियों और अन्य दलों के पार्षदों से भी सम्पर्क किया जा रहा है जो समर्थन दे कर बोर्ड बनवा सकते हैं। खास बात यह है कि अध्यक्ष का चुनाव 26 नवम्बर को और उपाध्यक्ष का चुनाव 27 नवम्बर को होना है। ऐसे में पार्टियों का सात दिन तक इन की “खातिरदारी“ करनी पड़ेगी। आमतौर पर पार्षद का चुनाव होने के दो से तीन बाद ही अध्यक्ष का चुनाव हो जाता है, लेकिन इस बार इसकी मियाद सात दिन रखी गई है।

इसे लेकर भाजपा ने आपत्ति भी की है और पार्टी अध्यक्ष सतीश पूनिया कई बार यह कह चुके हैंं कि परिणाम के सात दिन बाद अध्यक्ष का चुनाव कराना सरकार के मंसूबे साफ बता रहा है। चुनाव में 23 निकायों का फैसला निर्दलियों और अन्य दलों के जीते हुए पार्षदों के जरिए होना है। ऐसे में सबसे ज्यादा खातिरदारी इन निर्दलियो की ही होनी है। दोनों पार्टियों ने अपने वरिष्ठ नेताओ को निकायों में सक्रिय कर दिया है और अब सात दिन तक सरकार के कई मंत्री और विपक्ष के कई नेता इन निकायों में ही डेरा डाले रहेंगे। पार्षदों का यह राजनीतिक पर्यटन 27 नवम्बर को उपाध्यक्ष के चुनाव के बाद ही समाप्त होगा।

Posted By: Navodit Saktawat