राजस्थान के तीन बडे शहरों जयपुर, जोधपुर और कोटा के नगर निगमों के चुनाव एक बार फिर टल गए है। इस बार टलने का कारण बना है कोरोना वायरस। राज्य सरकार के प्रार्थना पत्र और करीब दस जनहित याचिकाओं की सुनवाई करते हुए राजस्थान हाईकोर्ट के जस्टिस संगीत राज लोढ़ा और मनोज कुमार व्यास की खंडपीठ ने यह चुनाव 17 अप्रेल से छह सप्ताह के लिए टाल दिए है। सब कुछ ठीक रहता है तो अब यह चुनाव जून के पहले सप्ताह में होने की उम्मीद है।

राजस्थान के सबसे बडे तीन शहरों जयपुर, जोधपुर और कोटा के नगर निगम चुनाव पिछले वर्ष नवम्बर में होने थे, लेकिन चुनाव से ऐन पहले सरकार ने इन शहरों के नगर निगमों को दो-दो हिस्सों में बांट दिया। इसी के साथ यहां नए परिसीमन कराने के आदेश भी जारी कर दिए। ऐसे में उस समय इन शहरों के निगमों के चुनाव टालने पडे और इनमें प्रशासकों की नियुक्ति करनी पडी।

गुरूवार को जारी होनी थी अधिसूचना- हालाकि एक जनहित याचिका के बाद हाईकोर्ट ने यह चुनाव 17 अप्रेल तक कराने के निर्देश दिए थे और इसी के चलते चुनाव प्रक्रिया शुरू भी हो गई थी और गुरूवार को अधिसूचना जारी होनी थी। लेकिन इसी बीच कोरोन वायरस संक्रमण का मामला सामने आ गया और विश्व स्वास्थ्य संगठन, केन्द्र सरकार व राज्य सरकार ने कई तरह की एडवाइजरी कर दी। संक्रमण के खतरे को देखते हुए इन चुनावों को टालने की मांग उठ रही थी। इसे लेकर तीनों जिलों के कलक्टरों ने भी सरकार को पत्र लिखा था और खुद सरकार ने निर्वाचन आयोग से चुनाव खिसकाने का आग्रह किया था, लेकिन आयोग ने कहा था कि हम हाईकोर्ट के आदेश से बंधे है। ऐसे में सरकार खुद हाईकोर्ट में जाए।

आयोग से मिले पत्र के बाद चुनाव टालने के लिए राज्य सरकार मंगलवार को हाईकोर्ट पहुंची थी। महाधिवक्ता एमएस सिंघवी ने स्थानीय स्वायत्त शासन विभाग की ओर से प्रार्थना पत्र पेश करते हुए कहा कि कोरोना के वैश्विक महामारी घोषित होने के बावजूद चुनाव कराने से लोगों में संक्रमण फैलने का खतरा रहेगा। इस कारण इन्हें स्थगित किया जाए। सरकार के अलावा एडवोकेट पूनमचंद भंडारी, एडवोकेट आनंद शर्मा व एडवोकेट विजय पाठक सहित करीब नौ लोगों ने भी इस संबंध में हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। सरकार सहित इन सभी याचिकाओं पर बुधवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने सरकार और याचिकर्ताओ की मांग मानते हुए ये चुनाव 17 अप्रेल से छह सप्ताह के लिए स्थगित करने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि इसके बाद स्थिति में सुधार नहीं होता तो याचिकाकर्ता फिर कोर्ट में आ सकते है। कोर्ट के आदेश के बाद अब आयोग गुरूवार को अधिसूचना जारी नहंी करेगा।

Posted By: Navodit Saktawat

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