मनीष गोधा. जयपुर। कोरोना संक्रमण के लाॅकडाउन के चलते राजस्थान में ठप्प पड़ी राजनीतिक गतिविधियां अब “अनलाॅक 1“ में फिर से शुरू होने के संकेत मिल रहे हैं। अनलाॅक 1 के पहले ही दिन राज्यसभा चुनाव के लिए मतदान की घोषणा हो गई, वहीं सरकारी कार्यालय पूरी उपस्थिति के साथ शुरू होने की घोषणा के बाद राज्य निर्वाचन आयोग ने भी पंचायत और नगरीय निकाय चुनाव की तैयारियां शुरू कर दी। इस बीच भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने अपनी नई टीम जल्द घोषित किए जाने के संकेत दिए हैं तो सरकार में भी राजनीतिक नियुक्तियों की शुरुआत की अटकलें लग रही हैं।

राजस्थान में कोरोना संक्रमण का लाॅकडाउन ऐसे समय पर हुआ था जब यहां राजनीतिक गतिविधियां चरम पर थीं। 26 मार्च को राज्यसभा चुनाव के वोट पड़ने थे। राज्यसभा चुनाव में यहां की तीन सीटों में से दो पर कांग्रेस और एक पर भाजपा के निर्विरोध चुनाव की सम्भावना के बीच ही भाजपा ने अपने एक और नेता को चुनाव मैदान में उतार मतदान होना तय करा दिया था। ऐसे में दोनों दल अपने अपने विधायकों की घेराबंदी और जोड़तोड़ में जुटे हुए थे।

इनसे पहले राजस्थान, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र के कांग्रेस विधायकों की मेजबानी कर चुका था। इसके अलावा विधानसभा का बजट सत्र भी चल रहा था। सरकार में भी मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच कानून व्यवस्था और अन्य मुददों को लेकर खींचतान बढी हुई थी। इसके साथ ही अप्रैल में जयपुर, जोधपुर और कोटा के छह नगर निगमों व प्रदेश भर में पंचायत चुनाव की तैयारी भी चल रही थी।

इसी बीच कोरोना संक्रमण का लाॅकडाउन हो गया और न सिर्फ राज्यसभा चुनाव टले, बल्कि नगर निगम व पंचायतों के चुनाव भी टल गए और सभी तरह की राजनीतिक गतिविधियां ठप हो गई। शुरूआत में तो कोरोना की लडाई में सत्तारूढ कांग्रेस और प्रतिपक्षी भाजपा में काफी समन्वय भी नजर आया, हालांकि बाद में एक दूसरे पर आरोप प्रत्यारोप का सिलसिला शुरू हो गया।

राज्यसभा, नगरीय निकायों व पंचायत चुनाव की गहमागहमी

अब अनलाॅक 1 के साथ ही राजनीतिक गतिविधियां भी अनलाॅक होने के संकेत मिल गए हैं। अनलाॅक 1 के पहले ही दिन चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव के लिए 19 जून को मतदान कराने की घोषणा कर दी। यहां चूूंकि मतदान होना तय है, इसलिए अब विधायकों की जोडतोड में दोनों पार्टियां जुटी हुई नजर आएंगी। हालांकि कांग्रेस और भाजपा की सीटों के बीच अंतर काफी है, ऐसे में भाजपा के लिए दो सीट जीतना काफी मुश्किल है, लेकिन पार्टी की कोशिश रहेगी कि कांग्रेस के वोटों में कुछ हद तक सेंधमारी कर ली जाए।

इसके साथ राज्य निर्वाचन आयोग ने भी अटके पडे पंचायत चुनाव और अगस्त में होने वाले 129 नगरीय निकायों के चुनावों की तैयारी शुरू कर दी है और इनकी वोटर लिस्ट तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए है। राजस्थान में यह नगरीय निकाय चुनाव का दूसरा दौर होगा। पहला दौर पिछले वर्ष नवंबर में हो चुका है। इन निकायों के साथ ही जयपुर, जोधपुर और कोटा के छह नगर निगमों के लम्बित पड़े चुनाव कराए जाने की सम्भावना भी है। यानी राज्यसभा चुनाव की जोडतोड खत्म होने के साथ ही निकाय व पंचायत चुनाव की जोडतोड शुरू हो जाएगी।

भाजपा में प्रदेश कार्यकारिणी, सरकार में राजनीतिक नियुक्तियों की आस

चुनावों के अलावा भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया की नई कार्यकारिणी की घोषणा भी लम्बे समय से अटकी हुई है। वे पिछले वर्ष सितम्बर में अध्यक्ष बना दिए गए थे। इसके बाद दिसम्बर में निर्वाचित भी हो गए। पूनिया का कहना है कि उनकी तरफ से तैयारी पूरी है। पार्टी आलाकमान की स्वीकृति मिलते ही टीम घोषित कर दी जाएगी। वहीं सरकार में भी सत्तारूढ कांग्रेस के कार्यकर्ताओ को राजनीतिक नियुक्तियों का इंतजार है। लाॅकडाउन के दौरान कुछ आयोगों में सदस्यो की नियुक्तियां तो हुई है, लेकिन अभी भी कई आयेाग और बोर्ड बिना अध्यक्षों और सदस्यों के ही चल रहे हैं। ऐसे में अब इन में नियुक्तियों के लिए भी लाॅबिंग भी शुरू हो रही है।

Posted By: Arvind Dubey

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