जोधपुर। जोधपुर में एक समाजसेवी व कांग्रेसी नेता प्रेस वार्ता कर जेएनवीयू के एक शिक्षक पर शोध चोरी का आरोप लगाया है। पूर्व में कोंग्रेस के पदाधिकारी रहे और वर्तमान में स्वयं को कोंग्रेस के कार्यकर्ता बताने वाले कल्पेश सिंघवी ने कोंग्रेस पार्टी के सिंबल लगे लेटरहेड पर कला संकाय के एक शिक्षक पर आरोप लगाते हुए कहा कि जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में सारे शिक्षक मूल्यों को ताक पर रखकर विदेश में कंप्यूटर तकनीक का प्रयोग करते हुए अपने नाम से भारतीय शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित कर दिया गया। उन्होंने कि अनेकों शोध पत्रों में 75 प्रतिशत से अधिक साहित्य की चोरी की गई है।

मीडिया से बातचीत के दौरान उन्होंने नियमो का जिक्र करते हुए कहा भारतीय राजपत्र जुलाई 2018 भाग तीन खंड 4 में स्पष्ट अंकित है कि यदि चोरी किया गया शोध पत्र मूल शोध पत्र से 60 प्रतिशत से अधिक है तो वह शिक्षक 3 वर्ष तक किसी प्रकार का पर्यवेक्षण नहीं कर सकेंगे। चोरी की पुनरावृत्ति होने पर चोरी करने वाले पर नियमों के अनुसार निलंबन अथवा सेवा समाप्ति सहित अनुशासनात्मक कार्यवाही की जानी चाहिए । हालांकि प्रेस वार्ता में जिन शोधार्थियों के शोध पत्रों के चोरी होने का दावा किया गया उनमें से एक भी शोधार्थी उस प्रेस वार्ता में उपस्थित नहीं था ।। इधर यूजीसी के नियमों की बात करें तो नियमानुसार कोई भी विश्वविद्यालय यूजीसी के नियमों का सिरे से पालना के लिए बाध्य नहीं होता।

सूत्रों की माने तो जिस शिक्षक पर कल्पेश सिंघवी ने शोध चोरी का आरोप लगाया है उसी शिक्षक ने 2017 में उनकी पत्नी संगीता पर एट्रोसिटी मामला दर्ज कराया था, साथ ही कुछ दिन पूर्व ही उस शिक्षक ने कुलाधिपति, मुख्यमंत्री वह कुलपति को भी एक लिखित शिकायत दी है कि उन्हें पूर्व विभागाध्यक्ष एवं उनके कहने पर कुछ लोग मानसिक रूप से प्रताड़ित कर रहे हैं।

Posted By: Navodit Saktawat