मनीष गोधा, जयपुर। केन्द्र का बजट आने के बाद अब राजस्थान सरकार भी बजट की तैयारियों में जुट गई है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सरकार के वित्त मंत्री भी है और इस नाते पिछले शुक्रवार और शनिवार को उन्होंने औदयोगिक और व्यापारिक संगठनों, कृषि संगठनों, युवाओं, महिलाओं, प्रोफेशनल्स और स्वयंसेवी संगठनों आदि से लम्बी चर्चाएं कर बजट के लिए सुझाव मांगे। राज्य का बजट 17 फरवरी को पेश होने की सम्भावना है।

राजस्थान में विधानसभा का बजट सत्र आहूत हो चुका है और दस फरवरी से इसकी नियमित कार्यवाही भी शुरू हो जाएगी। इसी दौरान सम्भवतः 17 फरवरी को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत वित्त मंत्री होने के नाते राज्य का बजट पेश करेंगे। मौजूदा कार्यकाल में यह उनका दूसरा बजट होगा। बजट को लेकर सरकार की तैयारियां जोर-शोर स ेचल रही है। केन्द्र का बजट आने के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि केन्द्र से अगले वित्तीय वर्ष के लिए राज्य को कितनी राशि मिलने की सम्भावना है। इसके साथ ही विभिन्न योजनाओं के मद में मिलने वाली राशि की स्थिति भी स्पष्ट हो गई है। ऐसे में अब राज्य के बजट में शामिल की जाने वाली योजनाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शुक्रवार और शनिवार को राज्य कर परामर्शदात्री समिति सहित समाज के विभिन्न वर्गो और संगठनों से मिल कर बजट के बारे में विस्तृत चर्चा की है और उनसे सुझाव भी लिए है। मुख्यमंत्री ने सभी वर्गों को यह आश्वासन दिया है कि बजट राज्य के हर वर्ग की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए बनाया जाएगा। इन बैठकों में देशव्यापी मंदी और केन्द्र सरकार से पर्याप्त आर्थिक सहायता नहीं मिलने की बात भी आई है, लेकिन गहलोत ने भरोसा दिलाया है कि वे अपनी ओर से सबको संतुष्ट करने का प्रयास करेंगे।

शनिवार को स्वयंसेवी संगठनों के साथ हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वैच्छिक संगठन जिन क्षेत्रों में काम कर रहे हैं उन्हें उससे जुड़े विभागों के अनुसार समूह बनाकर चर्चा के लिए आमंत्रित किया जाए, जिसमें वे स्वयं, संबंधित मंत्री एवं अधिकारी उपस्थित रहेंगे। वही ंषुक्रवार को युवा, खिलाड़ी, महिलाएं, प्रोफेशनल्स एवं प्रतिभाशाली विद्यार्थियों के साथ हुई चर्चा में गहलोत ने कहा कि राजस्थान के युवाओं में भरपूर प्रतिभा मौजूद है। वे अपनी योग्यता के दम पर राज्य के विकास में भागीदार बनें। सरकार उन्हें हर कदम पर प्रोत्साहित करेगी और पर्याप्त संसाधन उपलब्ध कराएगी।

आर्थिक स्थिति संकट में- मौजूदा वित्तीय वर्ष में सरकार की आर्थिक स्थिति बहुत अच्छी नहीं है। तीसरी तिमाही पूरी होने तक सरकार की आय करीब 60 प्रतिशत ही हो पाई है। जो पिछले वर्ष इसी अवधि के मुकाबले करीब तीन प्रतिशत कम है। कर राजस्व की बात की जाए तो दिसम्बर तक सिर्फ 58 प्रतिशत आय हो पाई थी जो पिछले वर्ष के मुकाबले आठ प्रतिशत कम है। उधर केन्द्र सरकार ने भी मौजूदा वित्तीय वर्ष में केन्द्रीय करो में राजस्थान को मिलने वाली हिस्सा राशि को 46,411 करोड़ से कम कर 36,049 करोड़ रूपये कर दिया है। इस प्रकार, राज्य को मिलने वाली करो में हिस्सा राशि में कुल 10,362 करोड़ रूपये की कमी की गई है। इसी प्रकार, वर्ष 2019-20 के बजट अनुमानों में विभिन्न योजनाओं के लिए घोषित केन्द्रीय अनुदान राशि में 4,000 करोड़ रूपये की भारी कमी की गई है।

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