जयपुर। टीचर का काम होता है बच्चों को अच्छी शिक्षा देना, लेकिन राजस्थान में तो एक मास्टर साहब ने अपना पूरा दिमाग भ्रष्टाचार में लगा दिया। फर्जी कर्मचारियों को सेवानिवृत्त कर शिक्षा विभाग को ही 35 करोड़ रुपए की चपत लगा दी। मामला यहीं नहीं रुका। इस गबन की राशि को ठिकाने लगाने के लिए 24 बैंकों में 510 खाते खुलवाए। ये खाते खुद के नाम के साथ ही परिजनों, रिश्तेदारों और परिचितों के नाम से खुलवाए। इस पैसे से क्रिकेट पर सट्टा भी लगाया, लेकिन पाप का घड़ा फूट गया और राज्य भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एंटी करप्शन ब्यूरो, एसीबी) ने कार्रवाई शुरू कर दी है। आरोपी 13 अगस्त तक पुलिस रिमांड पर है। उससे पूछताछ की जा रही है ।

आरोपी का नाम है ओमप्रकाश शर्मा जो श्रीगंगानगर में राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय नंबर-7 में शारीरिक शिक्षक के पद पर नियुक्त है। इससे पहले वह कई साल तक मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रतिनियुक्ति पर बाबूगिरी का कार्य रहा।

ब्लॉक शिक्षा अधिकारी हंसराज ने बतााय कि ओमप्रकाश ने पिछले 4 साल में 172 फर्जी कर्मचारियों की फर्जी तरीके से सेवानिवृत्ति दिखाकर उपार्जिंत अवकाश (PL) के मद में अपने रिश्तेदारों और परिचितों के खाते में 35 करोड़ रुपए ट्रांसफर कर इस घोटाले को अंजाम दिया है। इतना ही नहीं, उसने खुद को तीन बार सेवानिवृत्त दिखाकर उपार्जिंत अवकाश का भुगतान ले लिया।

ऐसे दिया फर्जीवाड़े को अंजाम

  • पुलिस थाना अधिकारी दिगपाल सिंह के मुताबिक, ओमप्रकाश शर्मा ने एक जनवरी 2015 से लेकर अब तक शिक्षा विभाग के रिकॉर्ड में 172 फर्जी नाम से कर्मचारियों के आईडी बनाए। इन कर्मचारियों का बकाया उपार्जिंत अवकाश (PL) के पे-बिल बनाकर जिला कोष कार्यालय को भेजे।
  • कोष कार्यालय से पे-बिल की रकम उसके द्वारा भेजे गए 172 फर्जी कर्मचारियों के खातों में ट्रांसफर होती रही। करीब साढ़े चार साल में उसने अपने परिजनों, रिश्तेदारों और परिचितों के खातों में 35 करोड़ रुपए जमा कराए ।
  • ओमप्रकाश शर्मा को सभी कर्मचारियों का आईडी नंबर लेने और उनके पे-बिल कोष कार्यालय में मेल करने के लिए जीपीएफ विभाग एवं कोष कार्यालय दोनों के लॉगइन पासवर्ड पता थे। लिहाजा वह जीपीएफ के लॉगइन पासवर्ड से फर्जी नाम के कर्मचारियों का आईडी बनाता था। इसके बाद उसी आईडी पर वेतन और भत्तों का बिल बनाकर कोष कार्यालय में भेज देता था । वे बिल पास होकर रकम फर्जी कर्मचारियों के खातों में पहुंच जाती थी, जिसे वह निकलवा लेता था ।
  • सभी फर्जी कर्मचारी उसने अपने रिश्तेदारों, परिजनों एवं परिचितों को बनाया । उनके खातों में रकम पहुंचते ही उन्हें कुछ कमिशन देकर मूल रकम खुद ले लेता था। इस तरह उसने घोटाले को अंजाम दिया।
  • पुलिस की जांच में सामने आया कि ओमप्रकाश शर्मा के परिजनों के नाम 200 बीघा से भी अधिक जमीन है । अब तक जिन बैंक खातों के बारे में पुलिस को पता चला है वह एसबीआई, पंजाब एंड सिध बैंक, कोटक महेंद्रा बैंक एवं ओरियंटल बैंक में खोले गए हैं।