मनीष गोधा, जयपुर। देश में एक तरफ Tablighi Jamat के लोग हैं जो हर तरफ मौत बांटते फिर रहे हैं। अपनी जानकारी छिपाकर खुद के साथ दूसरों की भी जान खतरे में डाल रहे हैं। दूसरी तरफ ऐसे लोग हैं जो अपनी जान पर खेलकर परिवार और अपने सुख-दुख को ताक पर रखकर केवल कोरोना संक्रमण को खत्म करने में लगे हैं। ऐसे ही एक कर्मवीर हैं राजस्थान के राममूर्ती। जयपुर के सवाई मानसिंह अस्पताल के आईसीयू की जिम्मेदारी निभाने वाले राममूर्ति मीणा ने अपने कर्म और फर्ज के लिए अपनी मां की अंतिम यात्रा तक छोड़ दी। इस खबर को जिसने भी सुना वो उनकी तारीफ करते नहीं थक रहा है।

सवाई मानसिंह अस्पताल में कोरोना मरीजों के लिए बने आइसोलेशन वार्ड और आईसीयू के नर्सिंग इंचार्ज राममूर्ति मीणा की मां का गांव में 30 मार्च को देहांत हो गया। लेकिन, राममूर्ति ने मरीजों के प्रति अपने कर्तव्य को पूरा किया और गांव जाने की बजाय वीडियो कॉल से मां के अंतिम दर्शन किए। उनसे बात हुई तो बोले यह समय ऐसा है जब काम पहले है और फिर मुझे अपने बारे में ही नहीं, उन सबके बारे में भी सोचना था जो गांव में मुझे मिलते। मां के अंतिम दर्शन नहीं कर पाने का दुख अपनी जगह है, लेकिन काम और समाज के प्रति जिम्मेदारी इस दुख से ज्यादा बड़ी है।

राममूर्ति मीणा राजस्थान के करौली जिले के राणोली गांव के रहने वाले है। परिवार में पिता है। तीन बडे भाई है। इनमें एक पटवारी और दो शिक्षक थे। तीनों रिटायर हो चुके है और गांव मे ही रहते है। राममूर्ति परिवार के साथ जयपुर के प्रताप नगर में रहते है। राममूर्ति बताते है कि मां 93 वर्ष की हो गई थी। परेशान थी। 30 मार्च को खबर मिली कि मां नहीं रही। भाईयों से बात हुई। उन्हें स्थिति पहले से ही पता थी।

उन्होने ही कहा कि तुम अपना काम सम्भालो, यहां का काम हम देख लेंगे। वीडियो कॉल से मां के अंतिम दर्शन करवा दिए। मन तो बहुत रोया, लेकिन यहां की जिम्मेदारी छोड़ कर जाना सम्भव नहीं था। सबसे अहम बात यह थी कि संक्रमण के खतरे के चलते मै यहां जयपुर में ही अपने घर नहीं जा रहा हूं तो गांव से कैसे चला जाता। वहां जाता तो मिलने वाले लोग भी खतरे में आ जाते। इसलिए दिल को समझाया और बाल तक नहीं उतरवाए।

सवाई मानसिंह अस्पताल इस समय राजस्थान में कोरोना मरीजों का सबसे बडा केन्द्र है और राममूर्ति अपनी टीम के साथ कोरोना के पॉजिटिव मरीजों को सम्भाल रहे थे। अब नई गाइडलाइंस के तहत वे दो अप्रेल से क्वारंटीन में है। अस्पताल के पास ही एक धर्मशाला में उन्हें क्वारंटीन किया गया है। उनका कहना है कि वैसे तो 14 दिन का क्वारंटीन है, लेकिन अभी जब तक खतरा पूरी तरह टल नहीं जाता, तब तक घर नहीं जा पाएंगे।

Posted By: Ajay Kumar Barve

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