जयपुर। कश्मीर के शोपियां में आतंकियों का शिकार बने भरतपुर के ट्रक चालक शरीफ का शव बुधवार सुबह उसके गांव पहाड़ी लाया गया। लेकिन ग्रामीणों और परिजनों ने उसका शव लेने से मना कर दिया और प्रशासन के सामने शरीफ को शहीद दर्जा देने के साथ ही 50 लाख रुपए मुआवजा देने और आश्रित को सरकारी नौकरी देने जैसी मांग रख दी। शरीफ खान का पार्थिव शरीर नई दिल्ली से 1 बजे एंबुलेंस में पहुंचा लेकिन आक्रोशित परिवार के सदस्यों और स्थानीय लोगों ने कहा कि वे इसे गांव में प्रवेश नहीं करने देंगे। उनकी मांगों को पहले पूरा किया जाना चाहिए। एक अधिकारी ने कहा कि शव को पहाड़ी शहर के एक अस्पताल की मोर्चरी में भेज दिया गया।

यह शव जैसे ही गांव में लाया गया, ग्रामीणों ने मांग को लेकर हाइवे तक जाम कर दिया। प्रशासन ने समझाइश कर जाम खुलवाया। शव अभी पहाड़ी के अस्पताल के शवगृह में रखा है। परिजनोंं ने हालांकि मंगलवार शाम को ही प्रशासन के अधिकारियों को अपनी मांग का ज्ञापन दे दिया था, लेकिन शव आने पर अब शव लेने से भी मना कर दिया। प्रशासन फिलहाल परिजनों से बातचीत करने की कोशिश कर रहा है।

कश्मीर में सोमवार को सेब की गाड़ी लेकर आते हुए चालक शरीफ की आंतकवादियों ने गोली मारकर हत्या कर दी तथा ट्रक को जला दिया। शरीफ के परिवार में पिता नूर मोहम्मद, माता जामिदा और पत्नी तथा तीन बेटियां हैं। एक ग्रामीण भगवान सिंह ने बताया कि सभी ग्रामीण गुस्से में हैं।

जब तक हमारी मांगे पूरी नहीं होती हम इस विरोध को जारी रखेंगे। हमें बताया गया है कि आर्टिकल 370 के निरस्त होने के बाद आतंकवादियों को हटा दिया गया है लेकिन यह सच नहीं लगता है। एक ग्रामीण व्यक्ति जो जम्मू-कश्मीर में रहकर कमाने के लिए गया था, मारा गया है। इससे तो अभी यही स्पष्ट होता है कि देश में आतंकवादी पनप रहे हैं।

Posted By: Navodit Saktawat