मनीष गोधा, जयपुर। राजस्थान में जयपुर के नजदीक चाकसू तहसील के गांव केशवपुरा आदर्श ग्राम के लोगों ने अपने गांव में सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल पर रोक लगा दी है। गांव में होने वाले सामूहिक भोज हों या रोजमर्रा का काम, यहां अब सिंगल यूज प्लास्टिक यानी प्लास्टिक से बनी थैलियां, पत्तल-दोने, गिलास या अन्य सामान का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा स्वतंत्रता दिवस पर किए गए आव्हान को मानते हुए यहां की ग्राम विकास समिति ने यह फैसला किया है। यहां पिछले कुछ समय 11 सामूहिक भोज हुए है, लेकिन किसी में भी प्लास्टिक के सामान का इस्तेमाल नहीं किया गया। इस मामले मे केशवपुरा आदर्श ग्राम आसपास के अन्य गावों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है और आस पास के 9 गांवोंं में अब यह मुहिम पहुंच रही है।

इस सम्बन्ध में 9 गांवोंं के लोगों की बैठक यहां हो रही है, जिसमें इन गांवों को प्लास्टिक मुक्त करने का निर्णय किया जाएगा। गांव को प्लास्टिक मुक्त करने के लिए यहां के युवा हर घर से सिंगल यूज प्लास्टिक से बना सामान एकत्र कर रहे हैंं और गांव में भी जहां प्लास्टिक की थैलियां आदि हैं, उन्हेंं एकत्र कर आग के हवाले किया गया है।

गांव की ग्राम विकास समिति के प्रमुख गल्लाराम कहते हैंं कि प्लास्टिक के खतरे का हम सभी जानते है। हमारा गांव अपनी अनूठी परम्पराओं के लिए जाना जाता है। इसी को आगे बढ़ाते हुए हमने गांव को प्लास्टिक मुक्त करने का फैसला किया है।

1981 में उजड़ गया था गांव

केशवपुरा आदर्श ग्राम के रूप में जाना जाता है। जयपुर में 1981 जबर्दस्त बाढ़ आई थी और उस बाढ़ में यह गांव पूरी तरह उजड़ गया था। तब यह छादेला खुर्द हुआ करता था। बाढ में यहां 2 पक्के मकानों को छोड़कर अन्य सभी मकान, पशु और पशु पानी में बह गए।

उस समय राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की ओर से गठित राजस्थान बाढ़ पीडित सहायता और पुनर्वास समिति ने इस गांव को गोद लिया और जनसहयोग से 11 लाख रुपए जुटा कर यहां 64 पक्के मकान, सामुदायिक केन्द्र, शिवजी का मंदिर और मीठे पानी का कुआं तैयार कराया।

नए सिरे से बसे इस गांव का नाम केशवपुरा रखा गया और संघ के तत्कालीन सरसंघचालक बाला साहेब देवरस ने इसका लोकार्पण किया। पिछले वर्ष इस गांव को राजस्व ग्राम का दर्जा भी मिल गया।

यहां हैंं कई अलग परम्पराएं- इस गांव में कई अलग तरह के काम होते है जैसे यहां पूरा गांव दीवाली के बाद गोवर्धन पूजा साथ ही करता है। इसमे जाति बिरादरी का कोई भेद नहीं होता। गांव में सैनी, दरोगा, गोस्वामी, बैरवा व बलाई जाति के करीब सौ परिवार रहते हैं वे सभी वैदिक परंपरा के अनुसार आज भी एक स्थान पर बैलों की पूजन करते हैंं।

इसी तरह गांव में 15 दिन में सामूहिक श्रमदान का आयोजन होता है। सभी गांव वाले मिलकर पूरे गांव की सफाई करते हैंं और गांव को साफ सुथरा बनाते हैं। गांव के 60 प्रतिशत परिवारों के पास देसी गाय है और जब गाय दूध देना बंद कर देती है तो उसे भटकने के लिए छोड़ा नहींं जाता, बल्कि वह परिवार ही उसकी देखभाल करता है।

एक घर एक पेड़ - यहां बाढ़ के दौरान पौधे भी नष्ट हो गए थे। संघ के स्वयंसेवकों ने ग्रामीणों के साथ मिलकर यहां एक घर एक पेड की थीम पर काम किया। प्रत्येक घर के सामने एक पौधा लगाया गया और उसकी जिम्मेदारी स्थानीय परिवार को सौंपी गई। विकास समिति केशवपुरा आदर्श ग्राम ने आगामी 5 साल में 5000 पौधे लगाने का संकल्प लिया है।

Posted By: Navodit Saktawat