केन्द्र सरकार द्वारा आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत मध्यम, सूक्ष्म और लघु (एमएसएमई) उद्योगों के लिए घोषित पैकेज का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाने और राजस्थान की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के बारे में सुझाव देने के लिए टास्क फोर्स का गठन किया गया है। यह टास्क फोर्स उद्योग विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव की अध्यक्षता में बनाई गई है जो पांच जून तक अपनी रिपोर्ट सरकार को देगी।

राजस्थान में मध्यम, सूक्ष्म और लघु उद्योग बडी संख्या में है। इसके अलावा हस्तशिल्प, बुनकर और खादी की भी काफी इकाइयां राजस्थान में काम कर रही है। राजस्थान के हस्तशिल्प उत्पाद पूरी दुनिया में निर्यात किए जाते है। केन्द्र सरकार ने आत्म निर्भर भारत अभियान के तहत एमएसएमई उद्योगों के लिए करीब 73 हजार करोड का पैकेज घोषित किया है। सरकार की ओर से गठित टास्क फोर्स इस पैकेज का अध्ययन कर रही है और यह पता लगा रही है कि इस पैकेज से राजस्थान की एमएसएमई इकाइयों को ज्यादा से ज्यादा फायदा दिलाने और नई एमएसएमई इकाइयां शुरू कराने के बारे में ये पैकेज किस तरह उपयोगी साबित हो सकता है।

पिछले दिनों राजस्थान के मुख्य सचिव डीबी गुप्ता की अध्यक्षता में हुई एक उच्चस्तरीय बैठक में इस टास्क फोर्स को कुछ अन्य महत्वपूर्ण विषय भी सौंपे गए है। इनमें केन्द्र सरकार द्वारा एमएसएमई की नई परिभाषा के अनुसार राजस्थान के कानूनों और नीतियों में प्रस्तावित बदलाव, व्यापार करने में आसानी के मामले में राजस्थान देश में नवें स्थान पर है। इस रैंक को और बेहतर करने के लिए भी यह टास्क फोर्स सुझाव देगी। केन्द्र सरकार ने कृषि प्रसंस्करण के क्षेत्र के लिए कई योजनाएं घोषित की है। राजस्थान सरकार ने पिछले वर्ष ही कृषि प्रसंस्करण इकाइयों के बारे में नीति जारी की है। ऐसे में अब केन्द्र सरकार द्वारा दिए गए पैकेज के अनुसार इस नीति में भी बदलाव किया जाने के बारे में भी टास्क फोर्स सुझाव देगी। इसक अलावा विभिन्न वाणिज्यिक, औद्योेगिक और व्यापारिक संगठनों जैसे सीआईआई, फिक्की, क्रेडाई, एसोचेम आदि ने भी सरकार को कई सुझाव दिए है। इन पर भी यह टास्क फोर्स विचार करेगी।

राष्ट्रीय राजमार्गो के दोनो ओर निर्माण हब- राजस्थान सरकार राज्य से गुजर रहे राष्ट्रीय राजमार्गों के दोनों ओर की जमीनों को निर्माण हब के रूप में विकसित करने पर विचार कर रही है। इस बारे में एक प्रस्ताव भी तैयार किया गया है, जिसमें कहा गया है कि राष्ट्रीय राजमार्गो के दोनों ओर की जमीनों को मैन्यफेक्चिरिंग जोन के रूप में चिन्हित कर दिया जाए ताकि यदि कोई वहां निर्माण इकाई स्थापित करना चाहता है तो उसे भूमि परिवर्तन कराने की जरूरत न पडे। टास्क फोर्स को इस प्रस्ताव की उपयोगिता और नियमों के बारे में सुझाव देने को भी कहा गया है।

हवाई जहाजों का एमआरओ सेंटर झालावाड से जोधपुर या जयपुर- राजस्थान में भाजपा की पिछली सरकार के समय हवाई जहाजों की मेंटीनेंस, रिपेयर और ओवरहाॅलिंग (एमआरओ) के लिए झालवाड में एमआरओ सेंटर स्थापित करने का निर्णय किया गया था। इसके लिए करीब सौ करोड रूपए खर्च भी किए गए है। झालावाडा पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का निर्वाचन जिला है।

Posted By: Navodit Saktawat

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