जयपुर। राजस्थान में इस बार बारिश का दौर थमने का नाम ही नहीं ले रहा है। सामान्यत 15 सितम्बर तक लौट जाने वाले मानसूनी बादल अभी भी कई जिलोंं में डेरा जमाए हुए है और आठ जिलों में औसत से 60 प्रतिशत से अधिक यानी असामान्य बारिश हो चुकी है। इनमें झालावाड़ और प्रतापगढ़ में तो औसत से 90 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है। राजस्थान में मानसून अबकी बार करीब 20 दिन देरी से आया था और अब इतने ही दिन देरी से जाता भी दिख रहा है। सामान्य तौर पर राजस्थान में 15 सितम्बर तक बारिश थम जाती है, लेकिन इस बार अभी भी प्रदेश के दक्षिण पूर्वी हिस्से में बारिश का दौर जारी हैं। रविवार को भी जयपुर मे अच्छी बारिश हुई है।

अब तक प्रदेश में औसत से 44 प्रतिशत अधिक बारिश हो चुकी है और 528 मिमी औसत बारिश के मुकाबले 765 मिमी पानी बरस चुका है। प्रदेश के कुल 33 जिलों में से आठ में आसामान्य, 14 में औसत से अधिक, सात में सामान्य और चार में सामान्य से कम बारिश दर्ज हुई है। प्रदेश का दक्षिणी पूर्वी हिस्सा इस बार जम कर भीगा है।

इस हिस्से के अजमेर, बूंदी, चित्तौडगढ, झालावाड, कोटा, प्रतापगढ, राजसमंद औरउदयपुर में औसतन एक हजार मिमी से ज्यादाबारिश हुई है। इनमें प्रतापगढ में 1606 और झालावाड में 1657 मिमी बारिश हुई है जो यहां की सामान्य बारिश से लगभग दोगुनी हैं। इनके अलावा 15 जिले ऐसेहै जहां 500 से1000 मिमी केबीच बारिश हुई है। मौसम विभाग को अभी दो तीन दिन बारिश का दौर जारी रहने की उम्मीद है।

इस बारिश ने बांधों को भी लबालब किया हैं। राज्य में बांधों की कुल भराव क्षमता का 85 प्रतिशत पानी आ चुका है, जबकि पिछली बार 61 प्रतिशत पानी ही आया था। राज्य के कुल 810 छोटे बडे बांधों में से 641 में पानी आ चुका है और इनमें से 404 तो पूरी तरह भर चुके है।

बम्पर बुआई के आसार- अच्छी बारिश के चलते जहां कोटा सम्भाग के जिलों में फसल खराब हुई है, वहीं प्रदेश के अन्य हिस्सों में बम्पर बुआई के आसार हैं। कृषि व सहकारिता विभाग के प्रमुख शासन सचिव नरेश पाल गंगवार का मानना है कि इस बार में प्रदेश में अच्छी बारिश होने से बुआई 90 लाख हैक्टयर से बढ कर 1.05 करोड़ हैक्टयर तक होने का अनुमान है।

ऐसे में अक्टूबर, नवम्बर एवं दिसम्बर माह में किसानों को खाद और बीज आपूर्ति का विस्तृत प्लान तैयार किया जा रहा है। उनका मानना है कि किसानों को लगभग 15 लाख मैट्रिक टन यूरिया की आवश्यकता रहेगी। जबकि आमतौर पर प्रतिवर्ष लगभग 12.50 लाख मैट्रिक टन यूरिया एवं 4.25 लाख मैट्रिक टन डीएपी की आवश्यकता पड़ती है।

Posted By: Navodit Saktawat

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