जयपुर। राजस्थान मानवाधिकार आयोग ने लिव-इन में रहने वाली महिलाओं पर हैरान करने वाली टिप्पणी की है। आयोग का मानना है कि अपने पार्टनर्स के साथ लिव-इन में रहने वाली महिलाएं 'रखैल' के सामने होती हैं। आयोग के अध्यक्ष जस्टिस महेश चंद्र शर्मा और जस्टिस प्रकाश टांटिया ने इस संबंध में कहा कि यह राज्य और केंद्र सरकार की जिम्मेदारी है कि इस तरह के संबंधों को रोका जाए।

आयोग के मुताबिक, शादी में संबंधों को परिभाषित किए जाने की जरूरत है। घरेलू हिंसा कानून 2005 में ऐसी कोई व्याख्या नहीं की गई है। आयोग ने सुप्रीम कोर्ट का एक केस की उदाहरण दिया, जिसमें एक शादीशुदा पुरुष दूसरी महिला को रहने के लिए घर देता है और उससे अपनी शारीरिक जरूरतें पूरी करने के साथ ही नौकर की तरह काम करवाता है।

आयोग ने यह टिप्पणी भी की है कि लिव-इन को लेकर स्थिति पूरी तरह स्पष्ट करने की जरूरत है। क्योंकि देशभर में बड़ी संख्या में इसके मामले कोर्ट पहुंच रहे हैं।

दोनों जजों ने यह भी कहा कि इस तरह की महिलाओं की स्थिति रखैल की तरह होती है, क्योंकि उन्हें संविधान में प्रदत्त मानवाधिकार नहीं मिलते हैं।

Posted By: Arvind Dubey