मनीष गोधा, जयपुर। महिलाओं और बच्चों के साथ होने वाले अपराधाों की तुरंत सुनवाई और कार्रवाई के लिए देश भर के दस हजार पुलिस थानों में महिला सहायता डेस्क स्थापित की जाएगी। इसके लिए केन्द्र सरकार एक-एक लाख रुपए प्रति थाना की सहायता राशि देगी। पहले चरण यह डेस्क उन थानों में खोली जाएगी, जहां महिलाओं और बच्चों के साथ अपराध अधिक संख्या में दर्ज हो रहे हैंं। राजस्थान सरकार को भी केन्द्र का यह पत्र मिला है और अब उन थानों की सूची बनाई जा रही है जहां यह डेस्क स्थापित की जा सकती है।

दिल्ली के निर्भया कांड के बाद स्थापित किए गए निर्भया कोष के तहत केन्द्र सरकार ने यह योजना लागू की है और इस बारे में हाल में सभी राज्यों को महिला सहायता डेस्क से सम्बन्धित दिशा निर्देश भेजे गए हैंं। इन निर्देशों में कहा गया है कि उन थानों को प्राथामिकता दी जाए जहां महिला और बच्चों से जुड़े अपराध अधिक संख्या में दर्ज हो रहे है। इसके साथ ही यह भी कहा गया है कि थाने में सहायक पुलिस निरीक्षक स्तर की महिला अधिकारी को इस डेस्क का प्रभारी बनाया जाए।

डेस्क के साथ वकीलों, विशेषज्ञों और स्वयंसेवी संस्थाओं को जोडा जाए जो सहायता के लिए आने वाली महिलाओं को तुरंत राहत विधिक सहायता और पुनर्वास की सुविधा व अन्य सहायता दिला सकें। इसके साथ ही हर जिले में एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त करना होगा जो उस जिले में स्थापित महिला सहायता डेस्कों के काम की माॅनिटरिंग और समन्वय करेगा।

महिला सहायता डेस्क का उददेश्य है कि थाने में अपनी शिकायत लेकर आने वाली महिलाओ को किसी तरह की हिचक न हो और उनकी सुनवाई तुरंत हो सके। इस काम के लिए महिला सहायता डेस्क से जुडे सभी पुलिसकर्मियों को पर्याप्त प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। यह डेस्क पीडित महिला का केस दर्ज कर उसे सम्बन्धित अधिकारियों को भेजेगी और उस केस का पूरा फाॅलोअप करेगी।

इस सहायता डेस्क के लिए थाने में अलग से व्यवस्था की जाएगी। इसके पास अपने दो कम्प्यूटर, एक दुपहिया वाहन, फोन व अन्य सुविधाएं होंगी। केन्द्र सरकार की ओर से यह सुविधाएं जुटाने के लिए एक लाख रूपए प्रति थाना के हिसाब से सहायता दी जाएगी।

शुरुआत में दस हजार थानों में यह डेस्क होगी और योजना सफल रही तो इसी योजना को और बढ़ाया जाएगा। राजस्थान सरकार को भी केन्द्र का यह पत्र मिला है। गृह विभाग के अधिकारियों का कहना है कि पुलिस मुख्यालय को ऐसे थानों की सूची बनाने को कहा गया है जहां महिलाओं और बच्चों से जुडे अपराध अधिक होते दर्ज होते हैंं।

Posted By: Navodit Saktawat

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