जयपुर। बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में संस्कृत के असिसटेंट प्रोफेसर बनने को लेकर विवादों में आए जयपुर जिले के बगरू के रहने वाले फिरोज खान के पिता मुन्ना मास्टर उर्फ रमजान खान खुद को पद्मश्री मिलने को गोमाता का आर्शीवाद मानते हैं। पद्मश्री पुरस्कार दिए जाने की जब उनको सूचना मिली तो वह बगरू की गोशाला के मंदिर में प्रतिदिन की तरह भजन कर रहे थे। बातचीत में मुन्ना मास्टर ने कहा कि मैंने पूरे जीवन गोमाता की सेवा की है और श्याम के भजन गाए है इसलिए गोमाता ने छप्पर फाड़कर दिया है। पहले मेरे बेटे को बीएचयू में असिसटेंट प्रोफेसर बनवाया और अब मुझे पद्मश्री दिलवा दिया है। उन्होंने कहा कि गोमाता की सेवा करने और भजन गाने से बेहद आनंद मिलता है। भगवान कृष्ण और गाय पर भजन लिखने और गाने की वजह से मुन्ना मास्टर की काफी लोकप्रियता है।

चारों बेटों को दिलाई संस्कृत में उच्च शिक्षा

मुन्ना मास्टर के पिता मास्टर गफूर खान भी संगीत के ज्ञाता थे। वह बगरू के प्राचीन जुगल दरबार मंदिर में राधा कृष्ण और सीताराम के भजनों का गायन करते थे। मुन्ना मास्टर अपने पिता के साथ मंदिर में जाते थे और वहां पर पिता के साथ रहकर भजन गायकी का रियाज करते थे। आगे चलकर वह खुद मशहूर भजन गायक बन गए। उन्होंने अपनी दो बेटियों के नाम लक्ष्मी और अनिता रखे तो चार बेटों शकील खान, फिरोज खान, वकील खान और वारिस खान को संस्कृत की शिक्षा दिलवाई। उनका परिवार कृष्ण भक्त है। इनके घर में जगह-जगह भगवान कृष्ण और राधा की तस्वीरें लगी हुई हैं। मुन्ना मास्टर शुरू से ही आर्थिक समस्या से जूझते रहे, लेकिन कभी गरीबी को अपने ऊपर हावी नहीं होने दिया और बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाई।

साथियों के साथ मिलकर मनाया पद्मश्री का जश्न

रविवार को मुन्ना मास्टर हर दिन की तरह सुबह गोशाला पहुंचे और वहां गोसेवकों और मंदिर में आने वाले भक्तों के साथ मिलकर खुद को प्रतिष्ठित पुरस्कर मिलने की खुशी मनाई। केंद्र सरकार का आभार जताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान हर भक्त की सुनता है। भगवान के घर देर है अंधेर नहीं।

Posted By: Yogendra Sharma

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