मनीष गोधा, जयपुर। जहां चाह वहां राह। गांव के कुछ युवाओं ने भीषण गर्मी में अभी से बारिश के पानी को जलभंडार में बदलने का इंतजाम कर लिया है। इन्‍होंने इस अभियान को कैसे पूरा किया, यह अपने आप में प्रेरणा दायक है। पढ़ें यह कैसे संभव हुआ। कोरोना संक्रमण के दौरान शहरों से गांव पहुंचे युवकों ने लाॅकडाउन के समय का बेहतरीन उपयोग किया और जयपुर के नजदीक जमवारामगढ वन्य जीव क्षेत्र में वन्यजीवों के लिए पहाडी पर तलाई तैयार कर दी। बारिश के दौरान इस तलाई में इतना पानी जमा हो जाएगा कि वन्यजीवों को लम्बे समय तक परेशान नहीं होना पड़ेगा। इतना ही नहीं, इन्होंने अपने इस तलाई के आसपास जंगल में हो रही पेड़ों की अवैध कटाई को भी रूकवाया।

जयपुर के पास जमवारामगढ तहसील वन्य जीव अभयारण्य क्षेत्र है। यहां जयपुर की प्रसिद्ध रामगढ झील भी है जो अब पूरी तरह सूख चुकी है। इस क्षेत्र में कई वन्यजीव है जो पानी की तलाश में भटकते हुए आसपास के गांवों तक पहुंच जाते है और इससे गांव वालों में दहशत बनी रहती है। इसी इलाके पीली गांव के दो युवक हंसराज गुर्जर और अमन गुर्जर काफी समय से यहां बनी एक पहाडी पर पौधे लगाने का काम भी कर रहे है।

इसी दौरान इन्होंने पहाडी पर एक तलाई देखी जो कभी पहाडी पर जानवरों के पानी पीने के काम आती होगी, लेकिन अभी इसमें मिटटी भर चुकी थी। इन दोनों युवकों ने गांव में आकर अपने अन्य साथियों और यहां राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की आजाद शाखा चलाने वाले अपने भाई विक्रम सिंह गुर्जर से इस तलाई की खुदाई करने के बारे में चर्चा की। विक्रम सिंह ने बताया कि हमारी शाखा में गांव के 20-25 युवक आते है।

लाॅकडाउन के दौरान कई और युवक इन दिनों गांव में आए हुए हैंं। हमने सबसे चर्चा की और पिछले एक माह से गांव के करीब 35-40 युवक, जिनमें हमारे स्वयंसेवक भी शामिल है, सभी मिल कर रोज सुबह चार-पांच घंटे यहां श्रमदान करते हैं। हमने तलाई की मिटटी को साफ कर दिया है और एक अच्छा तालाब यहां तैयार हो गया है। मानसून में इस में इतना पानी आ जाएगा कि जानवरों को लम्बे समय पानी की दिक्कत नहीं होगी और वे गांव तक नहीं आएंगे।

विक्रम ने बताया कि अब इस तालाब में पत्थर लगाने की जरूरत है, लेकिन यह मुश्किल काम है, क्योंकि नीचे से पहाडी पर पत्थर ले जाना बिना मशीनों के सम्भव नहीं है। इस तलाई में पत्थर लग जाएंगे तो यह जानवरों के लिए और भी ज्यदा लम्बे समय तक उपयोगी रह पाएगी। उन्होंने बताया कि इसके लिए हम सरकार और स्वयंसेवी संस्थाओं से बात कर रहे है।

पेडों की अवैध कटाई भी रोकी- विक्रम सिंह ने बताया कि तलाई की खुदाई करने वाले युवकों ने यहां पेड़ों की अवैध कटाई भी रोकी। उन्होंने बताया कि लाॅकडाउन के अवैध शराब की भटिटयां चलाने वालोंं ने इस पूरे इलाके में पेडों की जबर्दस्त कटाई की है।

इस बारे में उन्होंने खुद राजस्थान सरकार के सम्पर्क पोर्टल पर दो बार शिकायत की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने बताया कि कटाई करने वाले उस इलाके में भी आए, जहां युवक तलाई का काम कर रहे थे, लेकिन युवकों ने उस इलाके में इन्हें पेड नहीं काटने दिए, लेकिन आसपास काफी संख्या में पेड काटे जा चुके है।

Posted By: Navodit Saktawat

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