नरेन्द्र शर्मा, जयपुर Rajasthan Politics राजस्थान में बीते एक माह से चल रहे सियासी संकट का अब अंत हो चुका है। फिलहाल तो ऐसा लग रहा है कि राजस्थान में कांग्रेस की गाड़ी पटरी पर लौट आई है, लेकिन इसकी सियासी घमासान की पटकथा का अंत लिखने में सोनिया गांधी के अलावा प्रियंका वाड्रा का भी हाथ है। रअसल कांग्रेस की युवा ब्रिगेड़ की पहल पर सचिन पायलट की पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी व महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के साथ मुलाकात और अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी की सहमति के बाद पूरे विवाद का अंत हुआ। इसके बाद सचिन पायलट खेमे की सुलह और समझौता का फार्मूला तय किया गया। इस फार्मुले के तहत अब पायलट समर्थक एक और विधायक उपमुख्यमंत्री व तीन मंत्री बनेंगे। इस दौरान अहमद पटेल मुख्यमंत्री अशोक गहलोत व पायलट के बीच समन्वय का काम करेंगे।

अशोक गहलोत से इसलिए नाराज थे सचिन पायलट

सूत्रों के अनुसार सचिन पायलट ने प्रियंका वाड्रा और सोनिया गांधी से कहा कि वे पार्टी के साथ हैं, लेकिन मुख्यमंत्री अशोक गहलोत डेढ़ साल से जिस तरह से उन्हें और उनके समर्थक मंत्रियों को सरकार के फैसलों में दरकिनार कर रहे थे, उसी को लेकर नाराजगी थी। पायलट के एक सबसे विश्वस्त विधायक व कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव ने बताया कि सचिन पायलट ने खुद की गांधी परिवार के प्रति वफादारी और प्रदेश में कांग्रेस संगठन को मजबूत करने को लेकर अपने काम का पूरा ब्योरा दिया।

पायलट खेमे के विधायकों पर नहीं होगी कार्रवाई

सचिन पायलट के साथ बातचीत में ये भी तय हुआ कि पायलट खेमे के विधायकों के खिलाफ केंद्रीय नेतृत्व कोई कार्रवाई नहीं करेगा। अगले दो माह में पायलट को संगठन में राष्ट्रीय स्तर पर जिम्मेदारी सौंपने के साथ ही उनके एक विश्वस्त विधायक को उपमुख्यमंत्री बनाया जाएगा। साथ ही यह भी तय हुआ कि गहलोत द्वारा बर्खास्त किए गए दो पूर्व मंत्रियों के साथ ही एक अन्य विधायक को मंत्रिमंडल में स्थान दिया जाएगा। राजनीतिक नियुक्तियों व प्रदेश कांग्रेस कमेटी की कार्यकारिणी के साथ ही अग्रिम संगठनों में भी पायलट की सलाह को प्राथमिकता दी जाएगी।

कोई तीसरा बन सकता है मुख्यमंत्री

सूत्र बताते हैं कि राहुल-पायलट की मुलाकात में यह साफ हो गया कि कांग्रेस तुरंत मुख्यमंत्री बदलने को राजी नहीं है, क्योंकि इससे गलत संदेश जाएगा। वहीं कांग्रेस ने पायलट से कहा है कि सामंजस्य के लिए कुछ समय तक इंतजार करें। हालांकि सियासी सूत्रों का कहना है कि नए फार्मूले में पायलट के हाथ सीएम का पद आना मुश्किल है, क्योंकि गहलोत खेमा उनके सीएम बनने का विरोध करेगा। ऐसे में संभव है कि राजस्थान में कोई तीसरा ही मुख्यमंत्री बन सकता है।

फार्मूला तैयार करने में इनका हाथ

सूत्रों के अनुसार राहुल की युवा ब्रिगेड में शामिल जतिन प्रसाद, भंवर जितेंद्र सिह, दीपेंद्र हुड्डा व मिलिद देवड़ा ने पायलट की कांग्रेस आलाकमान से बातचीत में मध्यस्थ का काम किया।

Posted By: Sandeep Chourey

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