सुखनंदन बंजारे, रायपुर। 'डीजल नहीं अब खाड़ी से, डीजल मिलेगा बाड़ी से ' इस नारे के साथ शुरू हुई छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण की योजना अब दम तोड़ चुकी है। योजना के शुरुआती वर्षों में कई गाड़ियां बायोडीजल से चलीं, लेकिन योजना के 7 वर्षों के बाद बायोडीजल प्लांट में अब डीजल नहीं बन रहा है। बायोडीजल प्लांट में अब महज ऑयल बनाकर उसे बेचा जा रहा है।

राजधानी में वीआईपी रोड में छत्तीसगढ़ बायोफ्यूल विकास प्राधिकरण ने 2005 में करीब 25 लाख रुपए खर्च करके एक संयंत्र की स्थापना की। इसकी क्षमता करीब 3 हजार लीटर प्रतिदिन बायोडीजल उत्पादन की है। योजना के करीब दो वर्षों तक इसका जमकर प्रचार-प्रसार हुआ और करोडों रुपए के रतनजोत के पौधे प्रदेशभर में रोपे गए।

प्लांट से बायोडीजल बनाने की शुरुआत भी हुई और मुख्यमंत्री डा.रमन सिंह की गाड़ी बायोडीजल से चलने लगी। प्लांट से बायोडीजल बनने के दो साल बाद योजना ने दम तोड़ दिया। वीआईपी रोड में प्लांट अभी भी है, लेकिन अब एक लीटर भी बायोडीजल नहीं बन रहा है।

10 करोड से अधिक खर्च

विभागीय अफसरों का कहना है कि योजना में करीब 10 से 12 करोड रुपए खर्च किए गए और डीजल का एक विकल्प देश के सामने रखा। लेकिन रतनजोत बीज की कमी और बायोडीजल बनाने के बाद खर्च की राशि इतनी अधिक है कि इसकी कीमत सामान्य डीजल के बराबर हो जाती है। यही वजह है कि बायोडीजल अब नहीं बनाया जा रहा है।

55 रुपए किलो में बेच रहे क्रूड ऑइल

विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्लांट से बायोडीजल की जगह अब क्रूड ऑइल बनाया जा रहा है। इसे 55 रुपए प्रति किलो की दर से लुब्रीकेंट कंपनियों को बेचा जा रहा है। इसी तरह रतनजोत से निकलने वाली खल्ली को भी करीब 7 रुपए किलो में ओडिशा की एक फर्म को बेचा जा रहा है। इस खल्ली का खाद के रूप में उपयोग किया जाता है। प्रक्रिया के दौरान ग्लिसराल को भी साबुन बनाने वाली फैक्ट्रियों को करीब 28 रुपए किलो बेचा जा रहा है।

बंद होने के कारण

पर्याप्त मात्रा में रतनजोत बीज नहीं मिलना

परिवहन का खर्च अधिक

बायोडीजल बनाने में खर्च अधिक

बायोडीजल की कीमत अधिक होने की वजह से बायोडीजल के खरीदार नहीं

ज्यादा दिन तक रखना संभव नहीं

केन्द्र को प्रस्ताव

विभागीय सूत्र बताते हैं कि प्राधिकरण की तरफ से एक प्रस्ताव केन्द्र सरकार को भेजा गया है। इस प्रस्ताव में केन्द्र से राशि की मांग की गई है। राशि मिलने के बाद इसे बड़े पैमाने पर फिर से चालू किया जा सकता है।

इनका कहना है

डीजल का बेहतर विकल्प बायोडीजल हो सकता है। आने वाले कुछ वर्षों में जब डीजल के दाम और बढ़ जाएंगे तब बायोडीजल का उपयोग किया जाएगा। रतनजोत पौधा पड़त भूमि में लगाया जाता है, इससे जमीन का झरण को बचाया जा सकता है और हरियाली भी इससे होगी। छत्तीसगढ़ में प्रयोग के तौर पर बायोडीजल बनाने की शुरुआत की गई थी और इससे कई गाड़ियां चलीं भी। अब बीज की उपलब्धता कम होने के कारण प्लांट से बायोडीजल नहीं बनाया जा रहा है। बिना लाभ के इस प्लांट से ऑइल का उत्पादन किया जा रहा है ।

डीडी नाटेकर, नियंत्रक वित्त, छत्तीसगढ़ बायो फ्यूल विकास प्राधिकरण

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