हरियाणा विधानसभा चुनाव इस बार बहुत अलग और रोमांचक होने जा रहे हैं। 1966 में प्रदेश के गठन के बाद से यहां परिवारवाद की राजनीति हावी है, लेकिन इस बार तीनों लाल- देवीलाल, बंसी लाल, भजन लाल और चौटाला खानदान की हालत पतली नजर आ रही है। इन्हें भाजपा व अन्य दलों से बड़ी चुनौती मिली है।

देश में जब भी वंशवाद की राजनीति की चर्चा होती है, हरियाणा की मिसाल जरूर पेश की जाती है। बीते 48 वर्षों में चुनिंदा परिवारों के ही मुख्यमंत्रियों ने हरियाणा पर राज किया है। मसलन- बंसीलाल खानदान ने 4,633 दिन, भजनलाल खानदान ने 3,952 दिन और चौटाला खानदान ने 3,853 दिन सीएम की कुर्सी का सुख भोगा।

वर्तमान में भूपिंदर हुड्डा को भी मुख्यमंत्री बने 3,300 से ज्यादा दिन हो गए हैं। वहीं गैर-राजनीतिक परिवारों के राजनेताओं को महज 1,184 दिन सीएम की कुर्सी पर बैठने का अवसर मिला है।

इस बार भी राजनीतिक परिवारों की नई पीढ़ी मैदान में है। देवीलाल के बेटे ओम प्रकाश चौटाला अपनी पार्टी (आईएनएलडी) की ओर से सीएम पद के उम्मीद हैं। यही हाल एचजेसी-एचजेपी गठबंधन की ओर से कुलदीप विश्नोई का है। बंसीलाल के परिवार से किरण चौधरी, श्रुति चौधरी और रणबीर सिंह महेंद्रा चुनाव लड़ रहे हैं। रिकॉर्ड तीसरी बार हुड्डा भी सीएम पद के दावेदार बनाए गए हैं।

बहरहाल, वंशवाद की राजनीति को इस बार भाजपा और अन्य पार्टियों ने कड़ी चुनौती दी है। बसपा और हरियाणा लोकहित पार्टी ने भी इसे मुद्दा बनाया है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष रामविलास शर्मा के मुताबिक, पार्टी ने किसी नेता के रिश्तेदार को टिकट नहीं दिया है।

जाट बहुत क्षेत्र साबित होंगे निर्णायक

बीते लोकसभा चुनावों में हरियाणा में भी जबरदस्त मोदी लहर देखी गई थी। भाजपा ने आठ सीटों पर चुनाव लड़ा था, जिसमें से सात पर जीत दर्ज की। लेकिन जाट बहुल जिंद, सोनेपत और रोहतक के परिणाम इन क्षेत्रों की भाजपा विरोधी छवि के मुताबिक ही रहे। दरअसल भाजपा के पास कोई बड़ा जाट नेता नहीं है और इसका खामियाजा भुगतना पड़ा है। भाजपा को रोहतक में हार का सामना करना पड़ा था। सोनेपत में जीत जरूर मिली, लेकिन फीकी रही। तीनों क्षेत्रों में कांग्रेस को अच्छे वोट मिले थे।

बहुत गहरी हैं विरासत की ये जड़ें

  • हुड्डा परिवार : भूपिंदर सिंह हुड्डा दो बार से हरियाणा के मुख्यमंत्री हैं और जाट बहुत रोहतक में उनका खासा दबदबा है। उनके पिता रणवीर सिंह हुड्डा जानेमाने स्वतंत्रता सैनानी थे। भूपिंदर ने अपना राजनीतिक कैरियर यूथ कांग्रेस कार्यकर्ता से शुरू किया था। बीए और एलएलबी डिग्रीधारी भूपिंदर चार बार लोकसभा सांसद रह चुके हैं। भूपिंदर ने ही दिवंगत देवीलाल को रोहतक से हराया था। वर्तमान में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष का दायित्व भी भूपिंदर के कंधों पर हैं। भूपिंदर हुड्डा के बेटे दीपेंदर सिंह वर्तमान में रोहतक से सांसद हैं। बीते लोकसभा चुनावों में जीत दर्ज करने वाले वे अकेले कांग्रेस प्रत्याशी हैं। कांग्रेस विरोधी लहर के बावजूद दीपेंदर जीतने में कामयाब रहे थे। दीपेंदर तीसरी बार सांसद हैं और प्रदेश का सबसे युवा सांसद बनने का रिकॉर्ड भी उनके नाम है।
  • चौटाला परिवार : चौटाला गांव के जाट जमींदार परिवार से ताल्लुक रखने वाले चौधरी देवीलाल (2001) दो बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रहे थे। उन्होंने 1989 से 1991 के बीच देश के छठे उप-प्रधानमंत्री के रूप में भी सेवाएं दी थीं। देवीलाल के बेटे ओमप्रकाश चौटाला पांच बार प्रदेश के मुख्यमंत्री रह चुके हैं। उनके दूसरे बेटे, अजय और अभय चौटाला भी सक्रिय राजनीति में हैं। देवीलाल के पोते दुष्यंत सिंह हाल ही में हिसार से भाजपा सांसद चुने गए हैं। ओमप्रकाश और उनके बेटे अजय सिंह शिक्षक भर्ती घोटाले में दोषी पाए गए हैं और जनवरी 2013 में दिल्ली की अदालत ने दोनों को दस साल की कैद की सजा सुनाई है।
  • भजनलाल परिवार : भजनलाल दो बार मुख्यमंत्री रह चुके हैं। 2011 में अंतिम सांस लेने वाले भजनलाल राजीव गांधी सरकार में केंद्रीय मंत्री भी थे। उन्होंने 2007 में हरियाणा जनहित कांग्रेस का गठन किया था। उनके बेटे चंद्र मोहन बिश्नोई और कुलदीप विश्नोई सक्रिय राजनीति में हैं। चंद्र मोहन प्रदेश के डिप्टी सीएम भी रह चुके हैं। दूसरी शादी के चलते कैबिनेट से लंबी गैर जाहिरी के बाद उन्हें पद खोना पड़ा था। 46 वर्षीय कुलदीप वर्तमान में पार्टी प्रमुख हैं। वे लोकसभा सांसद भी रह चुके हैं। उन्हें बीते लोकसभा चुनावों में दुष्यंत चौटाला को हाथों हिसार में हार का सामना करना पड़ा था। कुलदीप ने हाल ही में भाजपा के साथ तीन साल से चल रहा गठबंधन तोड़ा है।
  • बंसीलाल परिवार : बंसीलाल वरिष्ठ कांग्रेस नेता थे और 2006 में निधन से पूर्व तीन बार हरियाणा से मुख्यमंत्री रह चुके थे। उन्हें हरियाणा का आर्किटेक्ट माना जाता है। वे इंदिरा गांधी के करीबी थे और रक्षा मंत्री भी रह चुके थे। वे सात बार हरियाणा विधानसभा सदस्य चुने गए। आगे चलकर उन्होंने हरियाणा विकास पार्टी बनाई। उनका बेटा रणबीर सिंह महेंद्रा पूर्व विधायक है, वहीं उनकी बहू किरण चौधरी वर्तमान में तोशाम से विधायक है। पोती श्रुति चौधरी भी सांसद थीं, लेकिन बीते लोकसभा चुनाव में हार गई थीं।

तेज हुई चुनावी हलचल

  • हरियाणा जनहित कांग्रेस (हजकां), हरियाणा जनचेतना पार्टी (हजपा) और बसपा के बीच महागठबंधन को लेकर मुख्यमंत्री की कुर्सी का पेंच फंस रहा है। हजकां-हजपा गठबंधन ने बसपा की सभी वर्गो को 20-20 प्रतिशत सीटें देने की शर्त तो मान ली है, लेकिन दोनों ही दल मुख्यमंत्री के पद पर किसी तरह का पुनर्विचार करने को तैयार नहीं हैं।
  • भाजपा में टिकट वितरण को लेकर विवाद जारी है। कार्यकर्ताओं में गुस्सा इस बात को लेकर ज्यादा है कि जो अभी पार्टी में आए उन्हें तो टिकट दिया जा रहा है, लेकिन जो पार्टी के साथ लंबे समय से जुड़े हैं, उनकी ओर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
  • उपचुनावों के तीजों से कांग्रेस में उत्साह है। माना जा रहा है कि इन नतीजों से हरियाणा में कांग्रेस को फिर से रेस में खड़ा कर दिया है। भाजपा और एचजेसी के बीच गठबंधन में दरार और प्रदेश में गैर जाट वोटों के बंटने को कांग्रेस अपने लिए बेहतर संकेत मान रही है।

हरियाणा की राजनीति पर एक नजर

प्रमुख मु्द्दे : मौजूदा सरकार का विरोध, जाटों के प्रति सरकार का लाड़-प्यार, नौकरियों में क्षेत्रवाद

प्रमुख दल : ताकत और कमजोरी

भाजपा : लोकसभा चुनावों की जीत, केंद्र में एनडीए की सरकार, जाट विरोधियों का साथ।

कमजोरियां : सीएम पद का कोई उम्मीदवार नहीं, महंगाई, बिखरा हुआ वोटबैंक।

कांग्रेस : जाट वोट बैंक में अच्छी पैठ, लोकलुभावन नीतियां।

कमजोरियां : प्रदेश सरकार के खिलाफ हवा, भ्रष्टाचार के आरोप, पार्टी में बिखराव।

इंडियन नेशनल लोक दल (आईएनएलडी) : जाटों का एकतरफा साथ।

कमजोरी : बड़े नेताओं की गैरमौजूदगी।

हरियाणा जनहित कांग्रेस (एचजेसी) : पूर्वी सीएम भजनलाल का ठप्पा

कमजोरी : जाट नाखुश।

2009 विधानसभा चुनावों के परिणाम

(कुल सीटें 90)

40 कांग्रेस

32 आईएनएलडी+एसएडी

06 एचजेसी

04 भाजपा

08 अन्य

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