आनंद दुबे / प्रवीण पाण्डेय भोपाल। समाज में एक रोचक बदलाव आ रहा है। पारंपरिक रूप से पुलिसकर्मी 'जय हिंद' टर्म का उपयोग करते रहे हैं। लेकिन अभिवादन का यह तरीका पुलिस विभाग में कम होता गया है। उधर, 'गुड मॉर्निंग' से विश करने वाले अंग्रेजी दां बच्चे 'जय हिंद' का उपयोग करने लगे हैं।

बात पहले बच्चों की। मौलाना आजाद नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (मैनिट) में पिछले महीनों में रैगिंग की शिकायतों ने जूनियर-सीनियर के बीच दूरियां बढ़ा दी थीं। उनके बीच इंटरएक्शन बढ़ाने के मकसद से स्टूडेंट काउंसिल की ओर से एक पहल की गई। इसके तहत ही अब जूनियर छात्र सीनियर को 'गुड मॉर्निंग' और 'गुड इवनिंग' कहने की बजाय 'जय हिंद' कहकर विश करते हैं। इस पहल ने जूनियर-सीनियर के बीच के फासले कम किए हैं। मैनिट में छात्र-छात्राओं की संख्या करीब 5 हजार है।

ताकि हमारे राष्ट्र को जानें

स्टूडेंट्स काउंसिल के सेक्रेटरी आशुतोष ठाकुर का कहना है कि पिछले दिनों 'तूर्यनाद' कार्यक्रम के तहत 'भारत को जानो' प्रतियोगिता हुई थी। इसमें छात्रों से देश से संबंधित कई सवाल पूछे गए थे लेकिन छात्र राष्ट्रभक्त और स्वतंत्रता सेनानियों को नहीं पहचान पाए थे। यहां से 'जय हिंद' को विश करने के लिए अपनाना तय किया गया।

ऐसे आया आइडिया

बीते नवंबर में कोलकाता में रैगिंग के शिकार आकाश अग्रवाल की मौत के बाद मैनिट स्टूडेंट्स ने एंटी रैगिंग के खिलाफ कैंडल मार्च निकाला था। इसमें सीनियर छात्रों को शामिल किया गया था। इसी बीच काउंसिल के सदस्यों ने सभी की सहमति से यह प्लान तैयार किया था।

दूसरे छात्रों को करेंगे जागरूक

आशुतोष ने बताया कि इस कैंपेन के सफल होने पर इससे दूसरे इंजीनयिररिंग कॉलेजों के स्टूडेंट्स को जागरूक किया जाएगा। इसके अलावा फेसबुक पर स्पेशल पेज बनाकर छात्रों को सोशल मीडिया के माध्यम से जागरूक किया जाएगा।

बदल गए पुलिस वाले

दूसरी ओर, बात पुलिस वालों की। सेना और केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवान आज भी अभिवादन में 'जय हिंद' की परंपरा को बरकरार रखे हुए हैं लेकिन पुलिस वालों में 'जय हिंद' की जगह नमस्कार और प्रणाम ने ले ली है। शायद इसकी वजह सियासत में आमूलचूल परिवर्तन है! आप किसी पुलिस थाने में फोन करें तो इसका अनुभव आपको खुद हो जाएगा।

वर्दी, देश का संयुक्त सम्मान

आरपीएफ में आज भी सिपाही से लेकर अफसर तक अभिवादन में 'जय हिंद' शब्द का ही इस्तेमाल करते हैं। यह देश के साथ ही वर्दी के लिए भी सम्मानसूचक है। इससे अनुशासन भी झलकता है। वर्दी पहने हुए व्यक्ति को अभिवादन में 'जय हिंद' कहना ही देश का सम्मान करना है। आरएसपी प्रसाद, कमांडेन्ट, रेल सुरक्षा बल, भोपाल मंडल

परंपरा बनाए रखनी चाहिए

मैं तो आज भी 'जय हिंद' ही कहता हूं। 'जय हिंद' के उद्बोधन की परंपरा पुलिस ने सेना, पैरामिलिट्री फोर्स से ली थी। काफी समय तक यह कायम भी रही। लेकिन समय के साथ इसे भुला दिया गया। सरकार, वरिष्ठ अफसरों को चाहिए कि वे इस परंपरा को पुनः कायम कराएं। 'जय हिंद' के उद्बोधन का मतलब ही वर्दी के साथ देश का सम्मान करना है। इसका उच्चारण करने में स्वतःस्फूर्त गर्व भी महसूस होता है। अरुण गुर्टू, रिटायर्ड डीजी