हरियाणा के गुरुद्वारों के प्रबंधन को लेकर हरियाणा और पंजाब की सरकारें आमने-सामने हैं। देश में गुरुद्वारों के प्रबंधन का विवाद अंग्रेजों के जमाने से चला आ रहा है, लेकिन वर्तमान जो हालात बने हैं, उन्हें ‘खतरनाक’ करार दिया जा रहा है। सियासत ने आग में घी डालने का काम किया है।

पंजाब में सत्तारूढ़ शिरोमणि अकाली दल को सख्त एतराज है कि हरियाणा के मुख्यमंत्री भूपिंदर सिंह हुड्डा कैसे अपने राज्य के गुरुद्वारों को शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एसजीपीसी) के नियंत्रण से वापस ले सकते हैं। वहीं कांग्रेस दी दलील है कि वह हरियाणा के लोगों से किया गया अपना वादा पूरा कर रही है।

बहरहाल, हालात खतरनाक इसलिए हो गए है कि एसजीपीसी की टास्क फोर्स के सिख तलवार भालों के साथ हरियाणा के गुरुद्वारों पर जमा हो गए हैं। एसजीपीसी को आशंका है कि हुड्डा सरकार अपनी पुलिस लगाकर उनसे गुरुद्वारे खाली करवा सकती है। ऐसा हुआ तो खून संघर्ष होगा।

क्या है विवाद

हरियाणा में अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी की मांग बीते करीब 14 साल से उठ रही है। वहां से सिखों का कहना है कि इससे राज्य के गुरुद्वारों का प्रबंधन सुधर सकेगा। 2005 में हरियाणा कांग्रेस ने इसे मुद्दे पर अपने घोषणा-पत्र में शामिल किया था। तब से कांग्रेस पर इस मुद्दे का राजनीतिकरण करने का आरोप लग रहा है।

भूपिंदर सिंह हुडा सरकार ने इसके लिए विधानसभा में बिल पेश किया और पास करवाकर कानूनी रूप भी दे दिया। वहीं, पंजाब में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी और वहां की सत्तारूढ़ पार्टी शिरोमणि अकाली दल शुरू से इसके विरोध में है। वहीं चंडीगढ़ में 10 सिख संस्थाओं ने प्रस्ताव पास किया है कि हरियाणा के गुरुद्वारों का प्रबंध वहां के सिखों को दिए जाने से ही सुधरेगा।

ब्रिटिश हुकूमत, शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी

  • देश पर अंग्रेजों का राज शुरू होने से पहले कई महाराजाओं और जागीरदारों ने अपनी जमीनें तथा तमाम संपत्तियां गुरुद्वारों के नाम कर दी थी। जब अंग्रेजों ने इसका रिकॉर्ड बनाना शुरू किया, तो कई महंतों ने तमाम जायदादों को अपने नाम करवा लिया।
  • इन महंतों पर निगरानी रखने के लिए 22 दिसंबर 1859 को अमृतसर के डिप्टी कमिश्नर ने एक बैठक बुलाई थी और 9 सदस्यों की एक कमेटी का गठन किया था।
  • लंबे संघर्ष के बाद 1925 में शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) बनी थी। तब पंजाब काउंसिल ने सिख गुरुद्वारा एक्ट 1925 बनाया, और इसके तहत ऐतिहासिक गुरुद्वारों का प्रंबध शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी को दिया गया।
  • देश के बंटवारे के बाद 1947 से पाकिस्तान स्थित गुरुद्वारों का प्रबंध शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से छिन गया। हालांकि 1999 में खालसा पंथ के 300 साल पूरे होने के अवसर पर वहां की सरकार ने गुरुद्वारों का प्रबंध देखने के लिए पाकिस्तान गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने का फैसला किया था।
  • बहरहाल, 1971 में राजधानी दिल्ली के गुरुद्वारों का प्रबंधन भी शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी से छिन गया। तब दिल्ली सिख गुरुद्वारा एक्ट 1971 बनाकर दिल्ली के गुरुद्वारों का प्रबंध दिल्ली सिख गुरुद्वारा मैनेजमेंट कमेटी को दे दिया गया।
  • आगे चलकर महाराष्ट्र और बिहार में भी अलग-अलग गुरुद्वारा कमेटियां बना दी गई हैं।
  • अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के अधिकार पंजाब, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश तक सीमित रह गया है।

अन्य राज्यों में भी उठी यही मांग

हिमाचल और राजस्थान में भी अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने उठी है। ऊना में गुरुनानक मिशन संस्था और हिमाचल सिख यूथ फेडरेशन के पदाधिकारियों ने इसके लिए प्रयास तेज करने की अपील की है।

सवालों के घेरे में दो मुख्यमंत्री

भूपिंदर सिंह हुड्डा, मुख्यमंत्री, हरियाणा

  • दलील – हमने हरियाणा गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी बनाने का वादा अपने घोषणा-पत्र में किया था, जिसे पूरा करने की कोशिश की जा रही है।
  • सवाल - यह मामला सालों से लंबित था। इसे इसी वक्त क्यों हवा दी गई? दस साल में पहली बार ऐसी क्या परिस्थिति पैदा हो गई कि विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर कानून पास किया गया? क्या इसका विधानसभा चुनावों से कोई कनेक्शन है जो महज दो-तीन माह दूर हैं।

प्रकाश सिंह बादल, मुख्यमंत्री, पंजाब

  • दलील – यह सिखों को बांटने की साजिश है और इसके पीछे कांग्रेस का हाथ है। हम चाहते हैं कि सभी गुरुद्वारों में एक जैसा प्रबंधन हो।
  • सवाल -कई राज्यों में अलग-अलग गुरुद्वारा कमेटियां हैं तो हरियाणा की अलग कमेटी बनने से सिख समाज कैसे बंट जाएगा? सभी गुरुद्वारों में एक समान सिस्टम लागू करना है तो ऑल इंडिया गुरुद्वारा एक्ट को लागू करने की कोशिश क्यों नहीं की जा रही है?। पहले केंद्र सरकार को दोषी करार देते थे, अब क्यों चुप हैं?

मोदी से मनमोहन जैसी उम्मीद

नरेंद्र मोदी की केंद्र सरकार से उम्मीद की जा रही है कि वह सहयोगी पार्टी शिरोमणि अकाली दल के दबाव में आने के बजाए वह करे, जो ऐसी ही परिस्थिति में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह ने किया था। 2008 में मनमोहन सिंह ने समय रहते सख्ती दिखाई थी और विवाद बढ़ने से रोक दिया था। बहरहाल, केंद्र का रुख फिलहाल स्पष्ट नहीं हुआ है। बीती 21 जुलाई को जब मामला संसद में उठा था, तब गृहमंत्री ने सिर्फ इतना कहा था कि मामला विचारधीन है।

कब क्या हुआ

  • 14 सालों से हो रही पृथक हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधन कमेटी (एचएसजीपीसी) की मांग। -2005 के चुनावों में कांग्रेस ने इसे अपने घोषणा-पत्र में शामिल किया था।
  • 6 जुलाई 2014 को कैथल में सिख समाज की एक सभा में हरियाणा के सीएम ने एलान किया कि हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाई जाएगी।
  • 11 जुलाई 2014 को प्रदेश की कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में कानून पास किया।
  • 14 जुलाई 2014 को राज्यपाल जगन्नाथ पहाड़िया ने कानून को मंजूरी दे दी।
  • 21 जुलाई 2014 को मामला संसद में गूंजा। अकाली दल ने इसे असंवैधानिक और गैर-कानूनी करार दिया।
  • 24 जुलाई 2014 को हरियाणा सरकार ने 41 सदस्यीय गुरुद्वारा प्रबंधक समिति का गठन किया।
  • 27 जुलाई 2014 को शिरोमणि अकाली दल बड़े आंदोलन का एलान किया था, जिसे बाद में वापस ले लिया।

सैकड़ों कर्मचारी, करोड़ों की आय

  • एसजीपीसी में कार्यरत हजारों कर्मचारियों में से 539 कर्मचारी हरियाणा से संबंधित हैं।
  • इनमें से 422 हरियाणा के गुरुद्वारों में कार्यरत हैं। शेष कर्मचारी हरियाणा से सटे पंजाब के जिलों में स्थित ऐतिहासिक गुरुद्वारों में सेवा निभा रहे हैं।
  • हरियाणा सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के गठन के बाद एसजीपीसी के 170 सदस्यों की ताकत घटकर 158 सदस्य रह जाएगी।
  • वर्ष 2012-13 के बजट में हरियाणा के गुरुद्वारों की आय 30 करोड़ रुपए थी। एसजीपीसी ने 27 करोड़ रुपए की राशि इन्हीं गुरुद्वारों के विकास के लिए खर्च की थी।
  • मीरी पीरी अकादमी की इमारत पर एसजीपीसी ने साढ़े 17 करोड़ रुपए खर्च किए थे।
  • हरियाणा में एसजीपीसी के जींद व दमसान में दो बड़े कॉलेज पर इस वर्ष एसजीपीसी को 20 करोड़ रुपए खर्च करने थे। अब यह राशि खर्च नहीं हो पाएगी। हरियाणा में एसजीपीसी की लगभग दो हजार एकड़ भूमि है।
  • एसजीपीसी के इतिहास में अब तक हरियाणा का कोई कर्मचारी न तो सचिव नियुक्त हुआ और न ही एडिशनल सेक्रेटरी।
  • एसजीपीसी ने अंबाला में एक हेडक्वार्टर बनाया है, जहां एडिशनल अधिकारी काम देखता है।
  • हरियाणा गुरुद्वारों से संबंधित 21 स्थानीय कमेटियां कई वर्षों से एसजीपीसी को दसवंध नहीं दे रहीं। इन प्रबंधक कमेटियों पर तीस करोड़ रुपये की राशि बकाया है।

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